
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से शहरी विकास प्राधिकरणों में प्राइम लोकेशन चार्ज समाप्त किए जाने का फायदा नोएडा और ग्रेटर नोएडा के खरीदारों को नहीं मिल पा रहा है। इसके उलट ग्रेटर नोएडा में आवासीय परियोजनाओं में मकान खरीदने वाले लोगों को जमीन के बजाए जमीन और निर्माण खर्च दोनों पर प्राइम लोकेशन चार्ज देना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के आवास विभाग ने शहरी विकास प्राधिकरण में कॉर्नर प्लॉट को छोड़कर कहीं भी प्राइम लोकेशन चार्ज लागू न किए जाने का शासनादेश जारी किया है। शासनादेश के मुताबिक, कॉर्नर प्लॉट पर भी संपत्ति के अधिकतम 10 फीसदी कीमत के बराबर ही पीएलसी जार्च वसूला जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस शासनादेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लागू न होने की जानकारी देते हुए ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के डिप्टी सीईओ पीसी गुप्ता ने बताया कि इस शासनादेश में दी गई यह व्यवस्था सिर्फ शहरी विकास प्राधिकरणों में कॉर्नर प्लॉट पर लागू होती है। चूंकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण है इसलिए यहां कॉर्नर प्लॉट पर पीएलसी चार्ज की कॉस्टिंग की व्यवस्था अलग है।
उधर, ग्रेटर नोएडा में बीएचएस-09 स्कीम के खरीदारों ने शहरी विकास प्राधिकरण की तरह नोएडा में भी सिर्फ कॉर्नर प्लाट पर ही पीएलसी चार्ज वसूलने की मांग तेज कर दी है। बीएचएस-09 वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य आशीष दीप का कहना है कि नोएडा में जमीन और निर्माण दोनों पर पीएलसी चार्ज वसूले जाने की वजह से फ्लैट खरीदारों को करीब डेढ़ से साढ़े चार लाख रुपये अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। बूम के वक्त रियल एस्टेट में पैसा लगाने वाले खरीदार अब प्राइम लोकेशन चार्ज जैसे खर्च में कटौती की मांग कर रहे हैं।
बदले आर्थिक माहौल ने रियल एस्टेट क्षेत्र के समीकरण बदल डाले हैं। साल भर पहले तक जहां ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से 40 लाख रुपये में भूखंड और उस पर बना मकान खरीदने वालों की लाइन लगी थी, वहीं अब खरीदार इसे घाटे का सौदा मान रहे हैं। प्रॉपर्टी बाजार की स्थितियों के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अथॉरिटी के साथ हुए सौदों पर पुनर्विचार कर आवंटियों को रियायतें देने संबंधी आदेश दिए हैं। लेकिन बीएचएस-09 स्कीम के आवंटियों को अभी तक ऐसे कोई छूट नहीं मिली है।