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इन्फ्रास्ट्रक्चर
क्षेत्र की कंपनी सीएंडसी कंस्ट्रक्शन की कोशिश है कि इस वर्ष यह राजमार्ग विकास के क्षेत्र में 1500 करोड़ रुपये और सीवरेज एवं वाटर सप्लाई के क्षेत्र में 400 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को पूरा करने में सक्षम हो जाए। काम का दायरा बढ़ाने के लिए यह देसी-विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित करने पर भी जोर दे रही है। सीएंडसी कंस्ट्रक्शन के अध्यक्ष गुरजीत सिंह जोहर से हमारे प्रमुख संवाददाता शिशिर चौरसिया से हुई बातचीत के प्रमुख अंश:
दिसंबर तिमाही का शानदार कार्य निष्पादन रहा। अगली तिमाही के क्या अनुमान हैं।
बेशक, बेहतर रहेंगे। कंस्ट्रक्शन कंपनी के लिए जनवरी से जून तक का समय काफी महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान न तो अत्यधिक सर्दी पड़ती है न ही बारिश होती है। जाहिर है कि इस दौरान हमारा काम तेजी से बढ़ेगा। हमें उम्मीद है कि इस तिमाही में हमारे कारोबार में 15 से 20 फीसदी और लाभ में करीब 25 फीसदी की वृद्धि होगी।
काम का दायरा बढ़ाने के लिए आपने संयुक्त उपक्रम की राह चुनी है। इसमें क्या प्रगति है?
हम अपने कार्यक्षेत्र का दायरा बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। ओमान में कामकाज शुरू करने के लिए हमने वहां की कंपनी त्नओमानी एंड कंपनीत्न तथा भारतीय कंपनी त्नबी सीनैया एंड कंपनीत्न (बीएससी) के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित किया है। इसमें हमारी और बीएससी की हिस्सेदारी 35-35 फीसदी की है और ओमानी कंपनी की हिस्सेदारी 30 फीसदी की है। इसके अलावा हम देश में भी कुछ साझा उपक्रम बना रहे हैं। इसमें स्पेन की कंपनी आइसोलेक्स और बेफेसा शामिल हैं।
सीएंडसी मूलत: राजमार्ग की कंपनी के रूप में जानी जाती है। आप इससे हट कर भी काम कर रहे हैं?
हम पावर ट्रांसमिशन, सीवेज और वाटर सप्लाई में भी विशेषज्ञता अर्जित करना चाहते हैं। इसी के लिए हमने यूरोपीय कंपनियों के साथ जेवी बनाया है। हमें मध्य प्रदेश में पावर ट्रांसमिशन का भी एक काम मिला है। इसके अलावा पंजाब के लुधियाना और पटियाला में सीवेज और वाटर सप्लाई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।
कंपनी के आर्डर बुक के बारे में बतायें?
इस समय हमारे आर्डर बुक में 4000 करोड़ रुपये का काम है जबकि राजमार्ग क्षेत्र में इस समय 20000 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए क्वालिफाइड हैं। जैसे जैसे निविदा खुलती जाएगी, कारोबार बढ़ता जाएगा।
इस समय आपके आर्डर बुक में क्या क्या महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं?
हम इस समय पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश आदि राज्यों की राजमार्ग, पावर ट्रांसमिशन, वाटर सप्लाई और सीवेज की परियोजनाओं को देख रहे हैं। इसके अलावा हमें अफगानिस्तान में संसद भवन बनाने का ठेका मिला है। वहां वर्ष 2003 से ही काम चल रहा है।