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नये बजट में टैक्स में कमी की उम्मीद

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मध्य प्रदेश में अगले वित्त वर्ष के लिए बजट की एक ओर जहां प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं वहीं कारोबारियों और उद्यमियों को भी बजट से काफी उम्मीदें हैं। चूंकि बजट के पेश होने के बाद कर दरें व्यापारियों के वर्ष भर तक के कारोबार की दिशा तय करती हैं इसलिए कारोबारियों की उम्मीदों के केंद्र में कर दरें ही सवरेपरि हैं। वहीं रोजगार, उद्योगों को मिलने वाली सुविधाएं और आम आदमी के लिए भी बात है। इस बारे में बात करने पर फेडरशन ऑफ मध्य प्रदेश चैंबर्स ऑफ कामर्स एण्ड इडस्ट्री के सचिव प्रताप वर्मा ने कहा कि हम चाहते हैं कि कर विसंगति दूर हो। उन्होंने कहा कि इनपुट टैक्स रिबेट, संपत्ति की दोबारा बिक्री पर लगने वाले टैक्स, एंट्री टैक्स आदि के लागू किए जाने और कर वसूली में बहुत-सी विसंगतियां हैं।



अगर यह दूर नहीं की गई है तो सरकार द्वारा की गई मेहनत के सकारात्मक परिणाम नहीं आ पाएंगे और प्रदेश में आने वाले नये निवेश के अवसर हतोत्साहित होंगे। सरकार द्वारा किये गये निवेश सम्मेलनों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। पीएचडी चैंबर्स के क्षेत्रीय निदेशक राजेंद्र कोठारी ने कहा कि बजट ऐसा हो जिससे रोजगार में वृद्धि हो। साथ ही कर अधिक होने के कारण टैक्सटाइन, ऑटो कंपोनेंट, सोया कारोबार आदि की टैक्स विकृति दूर होना चाहिए।



उन्होंने कहा कि बजट में आर्थिक उत्थान की बात तो की जाती है लेकिन अभी तक ऐसा जमीनी स्तर पर होता नहीं दिखता हम चाहतें हैं कि सही मायने में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देते हुए आर्थिक उत्थान वाला बजट हो।
पीथमपुर माइक्रो इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष गौतम कोठारी ने कहा कि बीते वर्ष बजट में चार फीसदी की वैट दर को सभी वस्तुओं पर बढ़ाकर पांच फीसदी कर दी गई थी हम चाहते हैं कि यह फिर से चार फीसदी हो जाए। मध्य प्रदेश टेक्सटाइल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके चौधरी ने कहा कि एंट्री टैक्स ज्यादा होने से कपास से धागा बनाने कीर लागत बढ़ जाती है। वहीं मंडी टैक्स कपास पर दो फीसदी है जबकि महाराष्ट्र में यह .75 और गुजरात और राजस्थान में यह शून्य फीसदी है ऐसे में किसान प्रदेश के बाहर कपास बेंच देते हैं।



बाद में जब हमें खरीदना पड़ता है तब फिर हमें एंट्री टैक्स भी देना होता है इसलिए हम चाहते हैं कि टैक्स की दरं पड़ोसी राज्यों जितनी हो जाएं। मध्य प्रदेश दाल उद्योग व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष सुरश अग्रवाल ने कहा कि वैट को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए वहीं सी फार्म की अनिवार्यता यदि वित्त मंत्री खत्म करते हैं तो बेहतर होगा।





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