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Arth Jagat Arth Jagat मुंबई। रिजर्व बैंक की ओर से बढ़ाया गया नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) भले ही 13 फरवरी से लागू होगा, लेकिन बैंकों ने फरवरी के पहले हफ्ते में कर्ज देने में काफी कमी की है। इसके कारण रिजर्व बैंक के पास रोजाना रिवर्स रपो में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कराई जा रही है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इस साल के पहले महीने में 15 जनवरी से लेकर 29 जनवरी के पखवाड़े में रिजर्व बैंक के पास रिवर्स रपो में बैंकों ने कुल 6.97 लाख करोड़ रुपए जमा कराया था। इसमें सबसे अधिक जमा 19 जनवरी को 81,715 करोड़ रुपए को कराया गया। वहीं, 20 जनवरी को 80,940 करोड़ रुपए और 27 जनवरी को 77,480 करोड़ रुपए जमा कराए गए। जबकि फरवरी महीने के पहले 5 दिनों में ही बैंकों ने 5.22 लाख करोड़ रुपए रिवर्स रपो में जमा करा दिए हैं।
इसमें एक फरवरी को 74,185 करोड़ रुपए, 2 फरवरी को 93,605 करोड़ रुपए, 3 को 1.17 लाख करोड़ रुपए, चार फरवरी को 1.18 लाख करोड़ रुपए और पांच फरवरी को 1.19 लाख करोड़ रुपए रिवर्स रपो में जमा कराया गया है।
दरअसल हाल में बैंकों के आए तिमाही के नतीजों के मुताबिक करीब-करीब सभी बैंकों के लाभ गिर हैं। इस लाभ में आई कमी के पीछे यही कारण था कि बैंकों ने तीसरी तिमाही में भी काफी कम कर्ज बांटे थे जिसके कारण उनकी ब्याज और और ट्रेजरी आय में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। जानकारों का मानना है कि बैंक अभी भी कर्ज बहुत संभल कर दे रहे हैं और इस कारण चौथी तिमाही में भी ट्रेजरी आय में गिरावट हो सकती है।
बैंक ऑफ इंडिया के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर वी.के.आर. अग्रवाल कहते हैं कि बैंक कर्ज उन्हीं को दे रहे हैं, जहां से वापस आने की संभावना है। बड़ी कंपनियों को कर्ज देने से अभी भी बचा जा रहा है, क्योंकि बड़े कॉरपोरट क्यूआईबी, क्यूआईपी और अन्य माध्यमों से पैसा जुटा रहे हैं, इसलिए बैंकों का लाभ गिरा है। उनका कहना है कि रिवर्स रपो में बढ़ रही राशि का थोड़ा बहुत असर सीआरआर का भी है, लेकिन मुख्य कारण बैंकों द्वारा कर्ज वितरण में कमी आना है। बकौल अग्रवाल, अप्रैल से कर्ज के वितरण में थोड़ा सुधार होगा और तब बैंकों की आय भी बढ़ सकती है।