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Arth Jagat Arth Jagat कारोबार सुधरने का असर छोटे और मझोले उपक्रमों (एसएमई) की रेटिंग पर दिखने लगा है। वित्त वर्ष 2009-10 में अभी तक जहां रेटिंग कराने वाली कंपनियों की संख्या में इजाफा हुआ है वहीं, कंपनियों की रेटिंग भी बेहतर हुई है। रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक घरेलू बाजार में ज्यादा कारोबार करने वाली कंपनियों की रेटिंग सबसे ज्यादा बेहतर हुई है। चालू वित्त वर्ष में अभी तक दवा उद्योग, ऑटोमोबाइल सेक्टर, फूड प्रोसेसिंग और इंजीनियरिंग गुड्स की कंपनियों की रेटिंग प्रमुख रूप से सुधार हुआ है। क्रिसिल रेटिंग एजेंसी के डायरेक्टर (एसएमई रेटिंग) रामराज पाई ने बिजनेस भास्कर को बताया कि अप्रैल 2009 से जनवरी 2010 तक क्रिसिल ने 4,528 एसएमई की रेटिंग की है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब दो गुना है। बीते वित्त वर्ष इसी दौरान क्रिसिल ने 2,211 एसएमई की रेटिंग की थी।
वैश्विक आर्थिक संकट के समय कारोबार में कमी की वजह से टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग और ऑटो इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों की रेटिंग में कमी आई थी। अब कारोबार सुधर रहा है, जिसका असर कंपनियों के रेटिंग पर दिख रहा है। मोटे तौर पर अधिकांश कंपनियों की रेटिंग में सुधार हुआ है। एसएमई रेटिंग एजेंसी समीरा के नेशनल सेल्स मैनेजर वीरेंद्र गोयल के अनुसार कंपनियों का कारोबार सुधरने से उनकी रेटिंग बेहतर हुई है। इस दौरान प्रमुख रूप से इलेक्ट्रिकल एंड इंजीनियरिंग गुड्स,मेटल एंड मेटल प्रोडक्टस, केमिकल्स और प्लास्टिक कंपनियों की रेटिंग सुधर रही है। अप्रैल 2009 से जनवरी 2010 तक समीरा ने 2,210 एसएमई की रेटिंग की है। जबकि इसी अवधि में पिछली तिमाही में 907 कंपनियों की रेटिंग की गई थी। इक्रा ऑनलाइन लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेश दुबे ने बताया कि आर्थिक संकट की मार से अब कंपनियां उबर रही हैं। इसका असर उनकी सुधरी रेटिंग से भी दिख रहा है। दवा उद्योग, फूड एंड प्रोसेसिंग उद्योग, ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़ी कंपनियों की रेटिंग में प्रमुख रूप से सुधार हुआ है।
हालांकि अभी भी निर्यात से जुड़ी कंपनियों की रेटिंग में खास सुधार नहीं है।
बात पते की..कंपनियों की रेटिंग अच्छी होने से, कारोबारियों को बैंक से कर्ज लेना आसान होगा। इसके अलावा बैंक से वह पहले से ज्यादा कर्ज,कम ब्याज दर पर भी पा सकते हैं।