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टेक्सटाइल
क्षेत्र को सुस्ती से उबरने का नया रास्ता मिल गया है। यह रास्ता है टेक्निकल टेक्साटाइल का। पंजाब, राजस्थान और हिमाचल की कई बड़ी कंपनियां टेक्निकल टेक्सटाइल में अपना कारोबार का विस्तार कर रही हैं। इसका प्रयोग कार के सीट कवर, पाराशूट, वाटर प्रूफ, फायर प्रूफ, बुलेट प्रूफ जैकेट, बच्चों के डाइपर, दस्ताने, एपरेन, बागवानी व इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र व स्पोट्र्स शूज के लिए हो रहा है।
पारंपरिक गारमेंट और होम फर्निशिंग उत्पादों से हटकर अब पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में एक दर्जन कंपनियांे ने टेक्निकल टेक्सटाइल का उत्पादन शुरू किया है। हिमाचल में टेकसूर्या टेक्सटेक, केके नोनवूवन और विमल मॉड्यूलर ने टेक्निकल टेक्सटाइल इकाइयां लगाई हैं। हिमाचल के काला अंब में इकाई लगाने वाले टेकसूर्या टेक्सटैक के निदेशक अनुराग गुप्ता ने बताया कि विश्व के कपड़ा उद्योग में महज 5 फीसदी वाले टेक्निकल टेक्सटाइल का कारोबार तीन साल में 40,000 करोड़ होने की उम्मीद है।
पंजाब के फगवाड़ा में जेसीटी लिमिटेड और राजस्थान के बासवाड़ा में एलएनजी भीलवाड़ा ग्रुप ने एक साल पहले टेक्निकल टेक्सटाइल उत्पादन शुरू करके देसी और विदेशी बाजारों में पैठ बनाई है। समूह के वाइस प्रेसीडंेट के. डी. जोशी ने बताया कि उनकी बासवाड़ा के मोरडी स्थित इकाई में हर माह 6 लाख मीटर टेक्निकल टेक्सटाइल का उत्पादन किया जा रहा है। यह कंपनी अग्नि रोधी टेक्सटाइल की सप्लाई देश-विदेश की अग्रणी एयरलाइंस कंपनियांे और भारतीय व रशियन रेलवे को कर रही है। मंत्रालय की ज्वाइंट टेक्सटाइल कमिश्नर शशि सिंह के मुताबिक पिछले साल टेक्निकल टेक्सटाइल की 72 कंपनियों द्वारा 1,500 करोड़ के निवेश के प्रस्ताव मंत्रालय के पास हैं, जो 2009-10 में 7,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।
टेक्निकल टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र समेत गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु की सरकारें भी 10 फीसदी सब्सिडी दे रही हैं। रेलवे व एयरलाइंस में सीट कवर से लेकर पर्दे इसी खास अग्निरोधी कपड़े के बने होते हैं। स्पोर्टटेक (खेल सामान में प्रयोग होने वाला टेक्सटाइल) और प्रोटेक (अग्नि, जल, शीत, रसायन, अल्ट्रावायलेट किरण और विस्फोट रोधी कपड़ा) के क्षेत्र में डेढ़ साल पहले प्रवेश करने वाली पंजाब के फगवाड़ा की जेसीटी लिमिटेड के सीनियर वाइस-प्रेसीडंेट एच. के. चोपड़ा ने बताया कि प्रोटैक टेक्सटाइल का भारतीय बाजार 2005 में 14.5 करोड़ डॉसर का था, जो 2010 में 45 करोड़ डॉलर होने की संभावना है।
उनके अनुसार इस उद्योग की औसतन वृद्धि दर 25 फीसदी है। स्पोर्टटेक क्षेत्र में उनकी कंपनी नाइकी, एडीडास और रीबॉक जैसी कंपनियांे को खास टेक्सटाइल की सप्लाई कर रही है। ऑटोमोबाइल और माइनिंग इंडस्ट्री, सेना के लिए वाटर व फायर प्रूफ टेंट के लिए भी टेक्निकल टेक्सटाइल का उत्पादन किया जा रहा है। कंपनी की फगवाड़ा इकाई की उत्पादन क्षमता 50000 मीटर प्रतिदिन की है, जिसमें कंपनी प्रति माह 4 लाख मीटर टेक्निकल टेक्सटाइल का उत्पादन कर रही है।
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की ज्वाइंट टेक्सटाइल कमिश्नर शशि सिंह के मुताबिक पिछले साल टेक्निकल टेक्सटाइल की 72 कंपनियों द्वारा 1,500 करोड़ के निवेश के प्रस्ताव मंत्रालय के पास हैं, जो 2009-10 में 7,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। टेक्निकल टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र समेत गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु की सरकारें भी 10 फीसदी सब्सिडी दे रही हैं।
डॉटा अपडेट
दुनिया के कुल कपड़ा कारोबार मंे 5 फीसदी की भागीदारी रखने वाले टेक्निकल टेक्सटाइल का कारोबार अगले 3 वर्षो मंे 40,000 करोड़ होने की संभावना।
भारत में टेक्निकल टेक्सटाइल का कारोबार 25 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ चालू वित्त वर्ष में 7,500 करोड़ होने की है पूरी उम्मीद।
इंडस्ट्री फैक्ट
जेसीटी फगवाड़ा, एलएनजी भीलवाड़ा ग्रुप जैसी टेक्सटाइल कंपनियांे ने टेक्निकल टेक्सटाइल का उत्पादन शुरू किया है ।
पंजाब, राजस्थान और हिमाचल मंे तकरीबन एक दर्जन कंपनियों ने टेक्निकल टेक्सटाइल उत्पादन के लिए लगाई इकाइयां।
कौन खरीदार
सेना, एयरलाइंस, रलवे, ऑटोमोबाइल कंपनियों के अलावा स्पोट्र्स शूज निर्माता नाइकी, एडीडास, रिबॉक जैसी कंपनियां खरीदार। टेक्निकल टेक्सटाइल का प्रयोग कार सीट कवर से लेकर बुलट, वाटर, फायर प्रूफ जैकेट, पेराशूट, डाइपर, दस्तानें आदि मंे बड़े पैमाने पर हो रहा है।