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रंगाई इकाइयां हटाने को तैयार नहीं हैं उद्यमी

औद्योगिक शहर पानीपत के रिहायशी इलाकों में लगी रंगाई इकाइयां विस्थापित होकर शहर से बाहर जाने को तैयार नहीं हैं। हरियाणा सरकार ने पानीपत में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए रंगाई इकाइयों को शहर के रिहायशी इलाकों से दूर विस्थापित करने के लिए सेक्टर 29 पार्ट टू विकसित किया है जहां एक सीसीटीपी (कॉमन कलेक्टिव वाटर ट्रीटमंेट प्लांट) भी लगाया गया है। तकरीबन 8 साल पहले स्थापित किये गये सीसीटीपी के बावजूद रंगाई इकाइयां शहर से बाहर विकसित किये गये इस औद्योगिक सेक्टर में जाने को तैयार नहीं हैं जहां प्रदूषित जल का शोधन किया जा सकता है। 2002 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) को कहा गया था कि एक ऐसा औद्योगिक सेक्टर विकसित किया जाए जहां तकरीबन 650 इकाइयों को स्थापित किया जा सके। इनमें सबसे ज्यादा 511 रंगाई इकाइयां शामिल हैं। इनमें से 400 इकाइयांे को इस सेक्टर में भूमि भी आवंटित कर दी गई पर कोई भी इकाई सेक्टर 29 के पार्ट टू मंे जाने को तैयार नहीं हुई। यहां 16 करोड़ की लागत से लगाया गया सीसीटीपी बेकार पड़ा है।



प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि सीसीटीपी की मदद से प्रदूषण को रोका जा सकता है पर रंगाई इकाइयांे के उदासीन रवैये से बोर्ड के प्रयास सिर नहीं चढ़े। पानीपत के औद्योगिक संगठनांे का इस बार में कहना है कि नये औद्योगिक सेक्टर में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं इसलिए वहां इकाइयां लगाना फिलहाल संभव नहीं है । बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि रंगाई इकाइयों के मालिकों को इस नये सेक्टर मंे जाने के लिए कई बार कहा गया है पर वे जाने के लिए तैयार नहीं हैं। रंगाई इकाइयांे को नये सेक्टर में विस्थापित किये जाने के विरोध में कुछ उद्यमियों ने अंतरिम राहत के लिए कोर्ट की भी शरण ली। इस पर कोर्ट ने उन्हें संबंधित विभाग से मामला मिल बैठकर निपटाने के निर्देश दिए पर मामला अभी तक निपट नहीं पाया है। यहां की रंगाई इकाइयां पश्चिमी युमुना नदी को भी प्रदूषित कर रही हैं। इससे न केवल यमुना नदी प्रदूषित हो रही है बल्कि इसके किनार बसने वाले लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ हो रहा है। प्रदूषण रोधी यंत्र पर होने वाले भारी खर्च से बचने के लिए यहां की कई रंगाई इकाइयांे ने प्रदूषण रोधी यंत्र नहीं लगाए हैं।



रंगाई इकाइयांे का प्रदूषित जल भूमि में भी छोड़ा जा रहा है जिससे पानीपत का प्रदूषित हुआ पेयजल पीने लायक नहीं रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले एक सप्ताह में यहां की तकरीबन 25 इकाइयांे को सील किया है । पिछले साल यहां की 87 प्रदूषण कारक इकाइयांे को नोटिस दिये गये । फिर भी इस समस्या पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है ।





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