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Arth Jagat Arth Jagat बेंचमार्क
प्राइम लेंडिंग रेट (पीएलआर) से कम ब्याज दरों पर बैंक लोन ले रहे ग्राहकों को अब ज्यादा ब्याज अदा करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के.सी.चक्रबर्ती ने शुक्रवार को यहां जो बात कही उससे कुछ ऐसे ही आसार नजर आ रहे हैं। चक्रबर्ती ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जिन सेगमेंटों को वाजिब ब्याज दरों से कम रेट पर लोन मिल रहे हैं उनके लिए लोन अब कुछ महंगा हो सकता है। कंपनियों को कम समय के लिए मिलने वाले लोन यानी अल्पकालिक कर्ज भी इनमें शामिल हैं। हालांकि, चक्रबर्ती का यह भी कहना है कि कुल मिलाकर ब्याज दरें फिलहाल स्थिर ही रहेंगी।
गौरतलब है कि बैंक आम तौर पर संभावित उपभोक्ताओं खासकर कॉरपोरेट ग्राहकों को अपने बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट से काफी कम ब्याज दरों पर कर्ज दिया करते हैं। इन ब्याज दरों को सब-पीएलआर कहते हैं।
चक्रबर्ती ने यह भी कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर (ढांचागत) क्षेत्र को दो-तीन साल तक लोन देने के लिए बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आगे चलकर कॉरपोरेट बांड मार्केट को विकसित करना पड़ेगा ताकि भारी-भरकम निवेश मांग को पूरा करना संभव हो सके।
आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने इस बात का भी जिक्र किया कि ढांचागत क्षेत्र को लोन देने के लिए आवश्यक धनराशि जुटाने के वास्ते बैंकों द्वारा जारी किए जाने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर बांडों को अनिवार्य तरलता जरूरतों के दायरे से बाहर रखने की मांग रिजर्व बैंक से की जा रही है। वैसे, चक्रबर्ती ने संकेत दिया कि बैंकों की ओर से की जा रही यह मांग संभवत: नहीं मानी जाएगी क्योंकि ऐसा होने पर आगे चलकर अन्य तरह के बांडों के लिए भी ऐसी ही गुहार लगाई जाने लगेगी।