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सेज क्षेत्र को छूट जारी रखने की मांग

वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले निर्यातोन्मुखी इकाइयों और सेज मामलों के महानिदेशालय (ईपीसीईएस) ने वित्त मंत्रालय से मांग की है कि आगामी बजट में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) को मिल रही कर छूट जारी रखी जाए। ईपीसीईएस के महानिदेशक एल. बी. सिंघल ने बिजनेस भास्कर से एक विशेष बातचीत में बताया कि अभी तो इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता कि वित्त मंत्रालय इस अपील पर क्या कदम उठाएगा, पर हमें पूरी उम्मीद है कि इस बार में फैली दुविधा बजट में जरूर खत्म कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने वित्त मंत्रालय से अपील की कि है कि प्रस्तावित डायरक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) प्रारूप में सेज क्षेत्र को लेकर जो प्रावघान हैं, वे सेज एक्ट के प्रावधानों के विपरीत हैं। उन प्रावधानों को सेज एक्ट के अनुरूप किया जाए, भले ही सेज क्षेत्र को और रियायतें न भी दी जाएं।



सिंघल ने कहा कि डीटीसी के प्रारूप पर देसी-विदेशी निवेशकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। वे इस टैक्स कोड में कर छूट को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं। सेज एक्ट के तहत यह दीर्घकालीन नीति बनाई गई थी कि इन्हें कर छूट मिलती रहेगी। यही वजह थी कि सेज को भारत में इतना अच्छा रिस्पांस मिला था। उन्होंने बताया कि सेज एक्ट के वजूद में आने अर्थात 10 फरवरी, 2006 के बाद से 31 मार्च, 2009 के बीच सेज क्षेत्र में होने वाला निवेश एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि ऐसे में अगर टैक्स कोड में सेज को लेकर कर छूट पर तुरंत स्थिति स्पष्ट न की गई तो निवेश से लेकर निर्यात और इसे मिलने वाले रोजगार पर भी काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा। sk.jha@businessbhaskar.net





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