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मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष (2010-11) के दौरान भारत आठ फीसदी की विकास दर हासिल करने की क्षमता हासिल कर सकता है। मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान विकास दर 6.75 फीसदी रही है। रिजर्व बैंक ने 7.5 फीसदी और सरकार ने 7 फीसदी जीडीपी दर का अनुमान लगाया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बयान में कहा गया है कि फौरी राजकोषीय और मौद्रिक उपायों के साथ राहत पैकेजों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लड़खड़ाने से बचा लिया। वित्तीय बाजारों के जोखिम उठाने के जज्बे में बढ़ोतरी दिखने लगी है और इससे विकास आर्थिक संकट के पहले वाली स्थिति में पहुंच गया है।
सुधारों के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन और पूंजी प्रवाह से निवेश में बढ़ोतरी हो रही है लेकि न बढ़ती महंगाई अर्थव्यवस्था का जोखिम भरा पहलू बनी हुई है। बढ़ता राजकोषीय घाटा रिकवरी पर ब्रेक लगा सकता है। मध्य अवधि में भारत की विकास संभावनाएं अच्छी बनी हुई हैं। इसकी कई वजहें रही हैं। सबसे बड़ी वजह रही ग्लोबल अर्थव्यवस्था के संकट के केंद्र में न होना। दूसरे भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास में इसके घरेलू कारकों का योगदान ज्यादा रहा है। बाहरी कारकों पर कम निर्भरता की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था ग्लोबल अर्थव्यवस्था में आए भूचाल को झेल गई।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को फंड मुहैया कराने के उपाय भी सुझाए हैं। आईएमएफ का कहना है इन्फ्रास्ट्र्क्चर सेक्टर को ऋण मुहैया कराने के लिए कॉरपोरेट ऋण बाजार विकसित करना होगा। इसके साथ ही पेंशन फंड और इंश्योरेंस सेक्टर से भी वित्त प्रबंध का काम हो सकता है। राजकोषीय प्रबंधन के सवाल पर आईएमएफ ने मजबूत योजना बनाने पर जोर दिया है। उसका कहना है ऋण का दबाव कम करने के लिए उपाय करने होंगे। सुधारों के जरिये इकोनॉमी में विश्वसनीयता बढ़ानी होगी और विकास को रफ्तार देने होगी। साथ ही पेट्रो उत्पादों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी कम करके इसे बाजार मूल्य से जोड़ने की सलाह दी गई है। हालांकि गरीबों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को किसी लक्षित समर्थन के साथ जोड़ देना चाहिए।
आईएमएफ ने कहा है भारतीय वित्त बाजार ने खुद को ग्लोबल वित्तीय के संकट से बचा लिया। इसके लिए इसकी सराहना की जानी चाहिए। हालांकि बैंकों की पूंजी को और मजबूत करने और नियमन और कड़े करने की जरूरत है। साथ ही डूबत ऋण और दिवालिया होने के मामलों में नए फ्रेमवर्क की जरूरत है।
आईएमएफ ने थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 8.1 फीसदी पर पहुंचने का कयास लगाया है। हालांकि अगले वित्त वर्ष इसके घट कर 5.5 फीसदी पर रहने की उम्मीद है। हालांकि निर्यात के मोर्चे पर निराशाजनक तस्वीर पेश की गई है। आईएमएफ का कहना है जब तक अमेरिका और यूरोप के बाजार में मांग नहीं निकलेगी तब तक भारत की निर्यात वृद्धि दर को समर्थन मिलने की संभावना काफी कम है।