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Drishtikon
Emotional Development Emotional Development वर्ष,
1950-51 के दौरान भारत की जीडीपी 10,000 करोड़ रुपये की थी। उस समय देश की आबादी 35 करोड़ थी और प्रति व्यक्ति आमदनी 285 रुपये थी। आज 2008-09 में देश की जीडीपी 54 लाख करोड़ की हो गई है। प्रति व्यक्ति आमदनी 48,450 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इस हिसाब से 2015 तक देश की जीडीपी 100 लाख करोड़ रुपये यानी एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। अगर रुपये और डॉलर की विनिमय दर स्थिर रही तो अगले सात-आठ साल में जीडीपी में एक ट्रिलियन डॉलर और जुड़ जाएगा। यह विकास यहीं नहीं रूकेगा। अगले सात-आठ साल में इसमें और इजाफा हो जाएगा। वर्ष 2025 तक भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
इस क्रम में जो ढांचागत बदलाव आएगा, उस पर गौर करना जरूरी है। 2025 तक जरूरी आवश्यकता पूरी करने के लिए 600 से 700 डॉलर की जरूरत पड़ेगी। इस समय देश में बचत दर 35 फीसदी है। इस समय प्रति उपभोक्ता ऐच्छिक खर्च 100 डॉलर है। हालांकि भारत की प्रति व्यक्ति आमदनी 2000 डॉलर तक पहुंचने और देश के निम्न आय से आगे आकर मध्य आय वर्ग में शामिल होने के बाद, इस तरह के ऐच्छिक खर्च में वृद्धि होगी। यह भारत की जीडीपी को एक नई ऊंचाई देगा।
देश की जीडीपी दो ट्रिलियन डॉलर होने के साथ लोगों की आय का स्तर बढ़ जाएगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं की मांग में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर 2001 में टेलीकॉम सेक्टर की
पहुंच सिर्फ चार फीसदी लोगों तक थी। लेकिन वर्ष 2009 में यह 40 फीसदी तक पहुंच गई। टेलीफोन सेक्टर में इस उछाल की वजह रही है उपभोक्ताओं तक वायरलेस फोन की आसान पहुंच।
अगले छह-सात साल में ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्क रण उद्योग, फैशनेबल कपड़े, आधुनिक संचार, हेल्थकेयर सेक्टर, ट्रांसपोर्ट, मनोरंजन और वित्तीय सेवा जैसे कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो ग्राहकों की बेसिक जरूरत नहीं पूरी करेंगे। उनका ध्यान ग्राहकों को वैल्यू एडेड सेवा मुहैया कराने पर होगा।
भारत में वर्ष 2007-08 के दौरान बचत दर 37 फीसदी थी। भारत में ऋण आवंटन सीधे-सीधे उपभोग को बढ़ावा नहीं देता है। बचत दर बढ़ने की वजह से आने वाले दिनों में सरकार की नीतियों में कई परिवर्तन हो सकते हैं। सरकार बचत दर को 40 फीसदी से नीचे रखने के लिए उपभोग को बढ़ावा दे सकती है। बहरहाल, आने वाले समय में नीति-निर्माताओं को उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था के संबंध पर नजर रखते हुए नीतियां तय करनी होंगी। भारत दुनिया की प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। लिहाजा यहां आने वाले समय में निवेश की कमी नहीं रहेगी। इससे जीडीलपी को एक नई ताकत मिलेगी। इसलिए इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले दिनों में देश में इससे भी बड़ा उपभोक्ता वर्ग उभरगा।