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बेहद संभल कर कदम उठाया रिजर्व बैंक ने

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कयासों के मुताबिक ही रिजर्व बैंक ने सीआरआर में 75 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि कर दी। अन्य बैंक दरों को यथावत रखा गया है। ज्यादा तरलता और बढ़ती महंगाई की वजह से रिजर्व बैंक पर बैंक दरों को लेकर कोई कदम उठाने का भारी दबाव था। मौद्रिक समीक्षा से पहले सीआरआर में आधा फीसदी की वृद्धि का अनुमान पहले ही लगाया जा रहा था। लेकिन रिजर्व बैंक ने एक कदम आगे बढ़कर पौन फीसदी की वृद्धि कर दी। रिजर्व बैंक को यह करना ही था। अर्थव्यवस्था में जिस तरह की रिकवरी दिख रही और महंगाई में इजाफा होता जा रहा है, उससे इस तरह का कदम उठाना तय था।



थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर फिलहाल 6.5 फीसदी है। मार्च, 2010 तक इसके बढ़ कर 8.5 फीसदी तक पहुंच जाने की संभावना है। सीआरआर में पौन फीसदी की बढ़ोतरी से तरलता में 36000 करोड़ रुपये की कमी आ जाएगी। तरलता में इस कमी से महंगाई को रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन क्या इस कदम का भविष्य में ब्याज दरों पर कोई असर देखने को मिलेगा। उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी रिकवरी की शुरुआत ही हुई है। लिहाजा ब्याज दरों का बढ़ना खतरनाक साबित हो सकता है। इससे विकास दर को चोट पहुंच सकती है। लेकिन रिजर्व बैंक ने जो क दम उठाया है, वह बढ़ती महंगाई का नतीजा है। अर्थव्यवस्था पर न सिर्फ खाद्य वस्तुओं बल्कि संपूर्ण महंगाई में वृद्धि का दबाव था। तरलता में 36000 करोड़ रुपये की कमी के बावजूद बैंकों के पास पर्याप्त तरलता है और इससे लोन की ब्याज दरों में इजाफा होने की कोई गुंजाइश निकट भविष्य में नहीं दिखती। अगर ब्याज दरों पर असर पड़ेगा तो वह भी बीपीएलआर से नीचे की दरों पर दिए जाने लोन पर। पिछले कुछ समय से कई बैंक बीपीएलआर पर लोन देने के मामले में बेहद आक्रामक रवैया अख्तियार किए हुए हैं। लिहाजा अब तक जो होम या कंज्यूमर लोन ग्राहक सस्ते लोन का लाभ उठा रहे थे, उन्हें थोड़ी बढ़ी दर का भुगतान करना पड़ सकता है।



बहरहाल, अगर आरबीआई ने सीआरआरआर में बढ़ोतरी की है तो यह सिर्फ महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ही नहीं है। रिकवरी को मैनेज करने के लिए भी रिजर्व बैंक को यह कदम उठाना ही था। रिजर्व बैंक को ऐसा कदम उठाना था, जिससे तरलता का बिल्कुल संकट भी न पैदा हो और मुद्रा प्रसार पर लगाम भी लगाई जा सके। इस समय सीआआर में बढ़ोतरी से उद्योग जगत के लिए ऋण प्रवाह पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि बैंकों के पास पर्याप्त तरलता है। सीआरआर में बढ़ोतरी का व्यापक प्रभाव तब दिखेगा, जब अगले महीने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी बजट पेश करेंगे। अगले महीने पेश होने वाले बजट प्रावधानों के आने के बाद यह साफ होगा कि रिजर्व बैंक, बैंक दरों पर अपनाई जाने वाली अपनी नीति का इनसे किस तरह तालमेल बिठा पाता है। लेकिन इतना तय है कि कोई भी कदम बेहद संतुलन भरा होगा, जैसा कि इस बार की सीआरआर बढ़ोतरी ने यह साबित कर दिया है।





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