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ग्रामीण विद्युतीकरण की धीमी चाल

देश में बिजली का उत्पादन जरूरत से काफी कम है। ग्रामीण इलाकों में बिजली उत्पादन की हालत और भी खराब है। ग्रामीण क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए ग्रामीण विद्युत प्रोग्राम (आरईपी) शुरू किया गया था। लेकिन इसकी राह में अब पर्यावरण और वन भूमि से जुड़े कानून आड़े आ रहे हैं। ऊर्जा मंत्रालय राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) जैसे कार्यक्रम की देखरेख कर रहा है। यह भारत निर्माण योजना का कार्यक्रम है। इस परियोजना पर 1.76 खरब रुपये खर्च हो चुके हैं।



बिजली मंत्रालय ने वन संरक्षण कानून,1980 से छूट की गुजारिश की है। पर्यावरण और वन मंत्रालय के निर्देशों पर गौर करें तो वन सलाहकार कमेटी (एफएसी) ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी योजनाओं को पर्यावरण और वन कानून से छूट देने का फैसला किया है क्योंकि ये समावेशी विकास को बढ़ावा देती हैं। दरअसल यह पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास के बीच संतुलन बिठाने का मामला है।
पर्यावरण और वन मंत्रालय की वन परामर्श कमेटी का गठन जमीन का गैर वन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल के नियमन के लिए हुआ था। वन भूमि का इतर इस्तेमाल के लिए वन संरक्षण अधिनियम की धारा 2 के तहत केंद्र सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है।



सीधे-सीधे इजाजत मिलना कठिन काम है। देश के दूर-दराज हिस्से में कई ऐसे इलाके हैं जहां तक ग्रिड पहुंचाने के लिए वन भूमि का इस्तेमाल करना पड़ता है। देश में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना अप्रैल, 2005 में शुरू हुई थी। वर्ष 2009 तक इस योजना के तहत 1,50,000 गांवों में दो करोड़ तीस लाख लोगों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य था। केंद्र सरकार का ऊर्जा मंत्रालय की ओर से 1,25,000 गांव तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य था। जबकि बाकी 25,000 गांवों में अक्षय ऊर्जा मंत्रालय को बिजली पहुंचाना था। लेकिन अब तक 69,000 गांवों में सिर्फ 89 लाख लोगों तक ही बिजली पहुंच चुकी है। ऊर्जा मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक इस दिशा में काम बेहद धीमी गति से हो रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत झारखंड जैसे राज्यों में आ रही है, जहां एक बड़ा इलाका वन भूमि क्षेत्र के दायरे में आता है।



झारखंड में 19,700 गांवों में 16 लाख लोगों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। लेकिन अब तक सिर्फ 10,600 गांवों में 70 लाख लोगों तक ही बिजली पहुंच सकी है। लेकिन झारखंड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ जैसे जनजाति बहुल राज्यों में माओवादी आंदोलन की वजह से ग्रामीण विद्युतीकरण योजना बेहद पीछे चल रही है। इस तरह की योजनाओं में देरी को देख कर प्रधानमंत्री कार्यालय में 2012 तक एक लाख गांवों के 1.75 करोड़ लोगों तक बिजली पहुंचाने के लिए डेडलाइन तय कर दी है। बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे स्वीकार कर चुके हैं कि ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में अड़चनें आ रही हैं। इस योजना के तहत लक्ष्य हासिल करने में अभी तीन साल और लग सकते हैं।





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