Google
HomeDrishtikonEmotional Development Emotional Development

डायरेक्ट टैक्स कोड का डर

दि अब तक के ज्यादातर वित्त मंत्री प्रत्यक्ष कर में किसी बड़े सुधार से खुद को बचाते रहे। लेकिन गृह मंत्री बनने से पहले वित्त मंत्रालय का कामकाज देख रहे पी चिदंबरम ने इस बीड़ा को उठाने का फैसला किया और आयकर अधिनियम की जगह लेने वाले नया प्रत्यक्ष कर कोड ड्राफ्ट करवा दिया । नए कोड से टैक्स निर्धारण प्रक्रिया सरल होगी और कर निर्धारण के अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीकों का इस्तेमाल हो सकेगा।



नए कोड के अधिनियम बनने से सबसे बड़ा झटका निवेशकों को लगेगा क्योंकि लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर मिलने वाली टैक्स छूट खत्म कर दी जाएगी। हालांकि कोड में 0.25 फीसदी की दर से लगने वाले सिक्यूरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स को खत्म करने को कहा गया है। इसका स्वागत होता। लेकिन शेयरों की बिक्री से होने वाले लाभ पर पूंजीगत लाभ कर लगाने की सिफारिश की गई है। इस तरह अल्प और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ का अंतर खत्म हो गया है। इससे पहले एक साल के बाद शेयरों की बिक्री हासिल लाभ पर कर नहीं लगता था।



अब यह लाभ आपकी आमदनी में शामिल कर ली जाएगी और कर निर्धारण के लिए बनाए गए नए स्लैब में डाल दिया जाएगा। इस प्रणाली के तहत निवेशक को निवेश और उस पर हासिल रिटर्न पर तो टैक्स कटौती का लाभ मिलता रहेगा। लेकिन जब वह रिटर्न समेत बचत राशि निकालेगा तो टैक्स देना पड़ेगा। पहले तीनों चरणों, यानी निवेश करने, रिटर्न हासिल करने और बचत की निकासी पर टैक्स छूट का लाभ मिलता था। इससे एक्जम्प्ट-एक्जम्प्ट-एक्जम्प्ट यानी ईईई प्रणाली कहते थे। नए कोड में उन्हीं लोगों की बचत को कर निर्धारण के दायरे से बाहर रखा गया है, जो 31 मार्च 2011 तक प्रविडेंट और पेंशन फंड स्कीम में योगदान करेंगे। ईईटी से एक ईएलएसएस यानी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) भी प्रभावित होगी। टैक्स बचाने वालों में ये स्कीमें काफी लोकप्रिय थीं। लेकिन नए कोड में ईएलएसएस में निवेश करने वालों से टैक्स वसूलने का प्रावधान है।



कुछ विशेषज्ञों का कहना है डायरेक्ट टैक्स कोड लोगों को उस समय छूट देगा जब वह कमा रहे होंगे, लेकिन रिटायर होने के वक्त उनकी आमदनी पर टैक्स लगा दिया जाएगा। भारत के लिए टैक्स-एक्जम्प्ट-एक्जम्प्ट की प्रणाली ही कारगर होगी। संपत्ति कर का बोझ बढ़ने की भी आशंका है। पचास करोड़ तक की संपत्ति पर कर नहीं लगेगा। यानी 51 करोड़ की संपत्ति पर सिर्फ 0.25 फीसदी की दर से 25000 रुपये कर देना होगा।
यह सुनने में अच्छा लगता है। लेकिन अब संपत्ति के दायरे में शेयर और दूसरे वित्तीय इंस्ट्रूमेंट भी जोड़ लिए गए हैं।



कंपनियों में प्रमोटरों की होल्डिंग को भी कर दायरे में ले लिया गया है। हालांकि यह न्यूनतम है। इसलिए इस पर ज्यादा चिंता नहीं जताई जा रही है। बहरहाल डायरेक्ट टैक्स कोड अभी कानून नहीं बना है। इसके विभिन्न पहलुओं की समीक्षा हो रही है। चिदंबरम का इस पर कड़ा रुख हो सकता था लेकिन लगता है प्रणब दा इस पर नरम रुख अपनाएंगे।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड:
 

Advt