देश में बिक रही विवादास्पद दवाओं पर निर्णय में देरी का लाभ दवा कंपनियों को ही मिल रहा है। वहीं, इन दवाओं का उपयोग करने वालों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ काफी खतरनाक हो सकता है। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने कई ऐसी विवादास्पद दवाओं को प्रतिबंधित करने की बात कही थी जो अपने दुष्प्रभावों के कारण कई देशों में प्रतिबंधित हैं और जिन्हें काफी पहले भारत में मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, डीसीजीआई ने इन दवाओं को सीधे प्रतिबंधित करने के बजाय ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (डीटीएबी) के पास निर्णय के लिए भेज दिया है जिससे इस पर निर्णय आने में देरी हो रही है।
इन विवादास्पद दवाओं में शामिल दर्द निवारक दवा निमेसुलाइड अपने दुष्प्रभावों के कारण ब्रिटेन, कनाडा, स्वीडन, डेनमार्क, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान समेत 168 देशों में प्रतिबंधित है। मजेदार बात यह है कि इस दवा को एक अमेरिकी कंपनी 3एम फार्मास्यूटिकल्स ने तैयार किया था, लेकिन अमेरिका में ही निमेसुलाइड प्रतिबंधित है। देश में निमेसुलाइड डॉ. रेड्डीज की नाइस और पैनेशिया बायोटेक की निमुलिड दवा के नाम से बिक रही है। सर्दी में खांसी-जुकाम से छुटकारा दिलाने में उपयोग की जाने वाली दवा डी-कोल्ड, विक्स-एक्शन 500, विनकोल्ड, सोल्विन, टसप्रेस और जीट आदि दवाओं में फिनायलप्रोपेनोलामीन (पीपीए) होता है। पीपीए के सेवन से मस्तिष्काघात (ब्रेन स्ट्रोक) होने के कारण इसे पूरे उत्तरी अमेरिका (संयुक्त राष्ट्र अमेरिका सहित) के साथ-साथ पश्चिमी यूरोप के सभी देशों (इंग्लैंड सहित) में भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसकी भी दोबारा जांच होनी है।
अवसाद (डिप्रेशन) के मरीजों को दी जाने वाली दवा डीएंक्सिट अपने साइड इफेक्ट के कारण अपने ही मूल देश डेनमार्क में प्रतिबंधित है। हालांकि, लूंडबैक कंपनी की दवा डीएंक्सिट को विकासशील देशों में बेचने के लिए तैयार किया जाता है। डीएंक्सिट में फ्लूपैंथिक्साल और मेलीट्रासिल दवा को भारत में बगैर आवश्यक क्लिनिकल ट्रायल के ही अनुमति दे दी गई है।
स्तन कैंसर की दवा लैट्रोजोल का उपयोग सिर्फ उन महिलाओं में करने की बात कही गई है जो रजोनिवृत्ति पा चुकी हैं, लेकिन इसका युवा महिलाओं में भी उपयोग हो रहा है। देश में इसका ट्रायल कराने की बात डीसीजीआई ने कही है, मामला डीटीएबी के पास है। इसके अलावा एंटीबायोटिक गेटीफ्लोक्सासिन पर भी निर्णय आना बाकी है।मंथली इंडेक्स ऑफ मेडिकल स्पेशियल्टी (मिम्स) के निदेशक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सी. एम. गुलाटी इसे निर्णय को टालने की कोशिश बताते हैं, जिसका लाभ दवा कंपनियों को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि नए ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत डीसीजीआई को किसी भी दवा को प्रतिबंधित करने का पूरा अधिकार है।
बात पते कीकई दवाएं अपने मूल देश में ही प्रतिबंधित हैं, फिर भी भारत में धड़ल्ले से इनकी बिक्री जारी है। कई दवाएं बेहद खतरनाक हैं, फिर भी देश में इन पर प्रतिबंध लगाने में की जा रही है कोताही।