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Emotional Development Emotional Development नवंबर,
2009 में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में आया उछाल विदेशी निवेश के मोर्चे पर खुशी का सबब बन सकता है। यह एफडीआई के मोर्चे पर अच्छे समय का संकेत है। नवंबर,2009 में देश में 1.74 अरब डॉलर का एफडीआई आया। वर्ष, 2008 के नवंबर महीने में एक अरब डॉलर का एफडीआई आया।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा की मानें तो अगर एफडीआई से जुड़ी सभी अधिसूचनाओं को एक जगह लाने का उनके मंत्रालय का काम पूरा हो गया तो पांच साल में एफडीआई 100 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। पहली नजर में यह छोटा सा काम लग रहा है। लेकिन जरा सोचिये कि निवेशकों को औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के 177 अधिसूचनाओं को खंगालना होगा। इनके अलावा कई मामलों पर रिजर्व बैंक के फैसलों का भी ध्यान रखना होगा।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने पीपीपी में निवेश के लिए हाल में एक अध्ययन को अंजाम दिया है। इस रिपोर्ट को पढ़ने से पता चल जाता है कि विदेशी निवेश में और इजाफे के लिए क्या किया जा सकता है। आर्थिक मामलों के विभाग ने 450 पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) परियोजनाओ में इक्विटी के स्त्रोत का पता लगाया। इनमें से सिर्फ में 22 में एफडीआई की भागीदारी थी और वह भी एक फीसदी। लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग को रफ्तार देने के लिए भी एफडीआई की काफी जरूरत है। पिछले एक दशक में जीडीपी की संरचना में तब्दीली आ गई है। अब इसमें सर्विस सेक्टर का योगदान काफी तेजी से बढ़ रहा है।
यह हमारी प्रतिस्पद्र्धी क्षमता का बेहतर उदाहरण है लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 17 फीसदी से ज्यादा नहीं हो रहा है। यह बेहद चिंता की बात है। इस तरह पिछले एक दशक के दौरान मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं का निर्यात 81 फीसदी से घट कर 63 फीसदी तक लुढ़क गया है। अगर एफडीआई में इजाफा होता है तो देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। इससे हम दुनिया के बाजार में लागत के मामले में चीन से मुकाबला कर सकते हैं। एफडीआई का प्रवाह अच्छा रहा तो मशीनी और ऑटो कल-पुर्जे, जेनेरिक दवाओं और खास रसायनों के निर्यात के मामले में हम एक बड़ा बाजार बन कर उभर सकते हैं। चूंकि इन चीजों को उत्पादन में तकनीकी कौशल की जरूरत पड़ती है। लेकिन पूंजी की कमी की वजह से इनका उत्पादन नहीं बढ़ पाता। विदेशी निवेश से इन उद्योगों को ज्यादा पूंजी हासिल होगा और उत्पादन रफ्तार पकड़ सकेगी।
अगर एफडीआई के नियमों एक ढांचे के दायरे में लाकर सुगम बनाया जाए तो विदेशी पूंजी के प्रवाह में निश्चित तौर पर तेजी दिखेगी। चीन ने एक दशक पहले इसे जान लिया था और इसने अपनी एफडीआई पॉलिसी सरल कर दी। अगर देश में एफडीआई प्रवाह बढ़ाना है तो बिजली का उत्पादन बढ़ाना होगा। नई परियोजनाओं के लिए जमीन मुहैया करानी होगी और पुरानी परियोजनाओं का विस्तार करना होगा।