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जन्मदिन पर तोहफे लेने के लिए विख्यात हो चुकी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमों मायावती ने इस बार अपने जन्मदिन पर तोहफे लेने की बजाय प्रदेश की जनता को भरपूर तोहफा दिया। मुख्यमंत्री ने अपने 54वें जन्मदिन पर सात हजार तीन सौ करोड़ रुपये की कल्याणकारी योजनाओं का लोकार्पण करने के साथ ही तोहफों की बौछार कर दी।
इसके साथ ही राज्य में एक नई पेंशन योजना की शुरूआत की गई। इस योजना के तहत राज्यभर के करीब 30 लाख गरीबों को 300 रुपये प्रतिमाह की पेंशन दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल मायावती के जन्मदिन के ठीक पहले इंजीनियर मनोज गुप्ता की हत्या कर दी गई थी। आरोप यह लगा था कि गुप्ता को चंदे के लिए मार दिया गया। यह चंदा बसपा नेताओं ने बहन जी के जन्मदिन के लिए मांगा था। इसी घटना से सबक लेते हुए मायावती ने ऐलान किया था कि इस बार न तो उनके जन्मदिन पर चंदा लिया जाएगा और न ही कोई खास इंतजाम होगा। पर जन्मदिन पर सरकारी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है।
अधिकारी मुख्यमंत्री को खुश करने में लगे हुए थे। साथ ही यह भी ख्याल रखा जा रहा था कि विरोधियों को मौका न मिले लेकिन विरोधियों ने मायावती के इस नए स्वरुप का विरोध करने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। पहले जन्मदिन पर मायावती कार्यकर्ताओं से तोहफों की उम्मीद करती रही है। यही नहीं इसके लिए बाकायदा पार्टी फोरम से निर्देश भी जारी होता था कि बहन जी के जन्मदिन पर कार्यकर्ता तोहफे लेकर आए। लेकिन इस बार ऐसा हुआ है कि मायावती ने अपने जन्मदिन को कल्याणकारी दिवस के रूप में मनाया है, लेकिन लखनऊ को जिस तरीके से नीले रंग से सजाया गया और अंबेडकर और कांशीराम मेमोरियल्स पर लाखों खर्च कर खूबसूरत झालरें लगाई गई थी, वह जरूर चर्चा का विषय बना हुआ था।
मायावती ने सात हजार 312 करोड़ रुपये की 264 जनकल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत की। मुख्यमंत्री ने राज्य में विभिन्न स्थानों पर बनने वाले 521 करोड़ रूपये के सड़क मार्ग, 462 करोड़ रूपये की लागत से 37 पुल और चार सौ करोड़ रूपये की लागत से 20 बिजली उपकेंद्रों का शिलान्यास किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने 23 सड़क मार्ग और 239 करोड़ रूपये की लागत से 72 पुलों का भी लोकार्पण किया। इन योजनाओं की शुरूआत के साथ ही मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को भी जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए प्रधानमंत्री को कई बार पत्र लिखा लेकिन आज तक एक फूटी कौड़ी नहीं मिली। मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी सहित सभी विरोधी दल उनके विरुद्ध षडयंत्र करने में जुटे हुए है।
उन्होंने कहा कि विरोधी दलों के साझे षडयंत्र के चलते ही केंद्र में सत्तारुढ़ यूपीए की पिछली सरकार में भारत-अमेरिका परमाणु करार के मुद्दे पर सरकार के विश्वासमत के दौरान मुझे प्रधानमंत्री न बनने देने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अंदरुनी मिलीभगत कर ली। उन्होंने कहा कि विरोधी दलों की यह मिलीभगत वर्ष 2009 में मार्च से मई के बीच हुए लोकसभा के आम चुनाव के दौरान भी जारी रही। मकसद सिर्फ यह था कि देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान और अमिट छाप बनाने वाली दलित की बेटी को किसी भी कीमत पर प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया जाए। मायावती ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस जानती है कि एक बार बसपा केंद्र की सत्ता में आ गई तो उत्तर प्रदेश की तरह ही उसका देश से सफाया हो जाएगा।