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रेलवे किसी तरह के नक्सली या आतंकी हमले से निपटने की रणनीति के तहत महत्वपूर्ण ट्रेनों में और बड़े स्टेशनों पर अपने कमांडो दस्ते तैनात करेगा। विशेष रेलवे सुरक्षा बल (एसआरपीएफ) की 12 बटालियनें (लगभग 1,200 जवान) राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में तैनात की जाएंगी। इन जवानों को रेलवे की संपत्ति को निशाने बनाने का प्रयास करने वाले वामपंथी उग्रवादियों और आतंकियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला हाल ही में रेलवे बोर्ड ने किया है। आरपीएफ के महानिदेशक रंजीत सिन्हा ने कहा कि कमांडो को सेना और अर्धसैनिक बलों के विभिन्न प्रशिक्षण स्कूलों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह बल इस तरह के हमलों की स्थिति में स्ट्राइकिंग यूनिट के तौर पर काम करेगा।
उन्होंने बताया कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरू, हैदराबाद, गुवाहाटी आदि जगहों पर कमांडो हब बनाए जाने पर विचार चल रहा है। सिन्हा ने बताया कि कमांडो अगले तीन-चार माह में अपना प्रशिक्षण पूरा कर लेंगे, उसके बाद तय किया जाएगा कि उन्हें कहां व क्या जिम्मेदारी देनी है। इन्हें नक्सल प्रभावित इलाकों, जम्मू कश्मीर व उत्तर पूर्वी राज्यों में तैनात किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि रेलवे परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण साधन है तथा आतंकियों व नक्सलियों के लिए यह सॉफ्ट टार्गेट माना जाता रहा है। कमांडो की यह तैनाती फूलप्रूफ सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। रेलवे लाइट मशीन गन (5.56 एमएम), बम निरोधक दस्ते तथा विशेष उपयोगी वाहन भी खरीदेगी। आधुनिक गैजेट्स व एके 47 जैसे हथियार तथा इंसास असॉल्ट राइफलें भी नक्सलियों से मुकाबले के लिए खरीद रही है।
कांस्टेबल व सब इंस्पेक्टर रैंक के 5000 कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। कुल 5134 पदों का सृजन किया गया है। रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स लगाने व निगरानी प्रणाली स्थापित करने के लिए रेलवे बोर्ड ने 300 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। महानिदेशक ने बताया कि इस योजना के पहले चरण में 195 स्टेशनों का चयन किया गया है।