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दस लाख श्रद्धालुओं की डुबकी के साथ महाकुंभ शुरू

कड़कड़ाती सर्दी के बीच मकर संक्रांति पर दस लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं द्वारा पवित्र नदी गंगा में पहले बड़े स्नान के साथ ही गुरुवार की सुबह हरिद्वार में महाकुंभ मेले की शुरुआत हुई। 14 अप्रैल तक चलने वाले इस महाकुंभ में चार से पांच करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान है। हरिद्वार में इस स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु बुधवार की सुबह से ही पहुंचने शुरू हो गए थे। बारह वषरें में एक बार आयोजित होने वाला यह मेला पूरी दुनिया में सबसे बड़े धार्मिक समागम के रूप में भी विख्यात है।



अधिकारियों ने पूरे मेला क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है ताकि कोई अप्रिय वारदात नहीं हो सके। लोक धारणा है कि कुंभ मेला में स्नान करने से त्नमोक्षत्न पाने में मदद मिलती है। इसके लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के असाधारण इंतजाम किए गए हैं। महाकुंभ की शुरूआत पर मौसम खुशगवार था। कई दिनों से मौसम की ठंडक और कोहरे की चादर को सूर्यदेव ने अपने प्रखर तेज से हटाया तो श्रद्वालुओं में स्नान का उत्साह दोगुना हो गया। देश के अलग-अलग कोनों से साधु-संन्यासियों ने हरिद्वार, कनखल, ऋषिकेश स्थित अपने स्थाई आश्रमों में आना शुरू कर दिया।



आने वाले दिनों में मेला क्षेत्र में सभी अखाड़ों की धर्मध्वजा स्थापित होने के बाद साधु-संन्यासी व नागा कुंभ क्षेत्र में पहुंचेगे। भारत के चार नगरों इलाहाबाद, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में बारी-बारी से 12 साल के बाद महाकुंभ मेला लगता है। पौराणिक आख्यानो के अनुसार समुद्रमंथन के दौरान निकला अमृतकलश 12 स्थानों पर रखा गया था, जहां अमृत की बूंदे छलक गई थी। इन स्थानों में से आठ ब्र±ांड में माने जाते हैं और चार धरती पर।



इन चारों जगहों पर कुंभ का मेला लगता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि इस मेले में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकुंभ में हरिद्वार का अपना विशेष स्थान है। महाकुंभ के दौरान शाही स्नान का भी अपना विशेष महत्व होता है। 12 फरवरी को महाशिवरात्रि के पर्व पर प्रथम शाही स्नान होगा। दूसरा शाही स्नान सोमवती अमावस्या के दिन यानी 15 मार्च को होगा। 14 अप्रैल को वैशाखी वर्ष पर महाकुंभ मेले का अंतिम शाही स्नान होगा। माना जाता है कि इस दिन देश भर के अखाड़े अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ शाही स्नान में भाग लेने के लिए जाते हैं।



गंगासागर में भगदड़ से सात मरे
गंगा सागर। पश्चिम बंगाल में गुरुवार को गंगा सागर मेले के दौरान हुई भगदड़ में सात लोग मारे गए जबकि 17 लोग घायल हो गए। घायलों में चार की हालत गंभीर है। इस मेले में मकर संक्रांति के मौके पर करीब चार लाख श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाने पहुंचे। यह भगदड़ तब मची जब मुरी गंगा नदी पार करने के लिए एक नौका में श्रद्धालु सवार हो रहे थे और इसी दौरान नदी के घाट पर बनी सीढ़ी टूट गई। मृतकों में छह वृद्ध महिलाएं तथा एक बज्‍जा शामिल है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल दो लोगों को डायमंड हार्बर हॉस्पिटल और 15 घायलों को समीपवर्ती काकद्वीप हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।





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