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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से देश के चीफ जस्टिस के साथ पिछले साल दो देशों की यात्रा पर र्गई उनकी पत्नी को दैनिक भत्ता देने के लिए कहा है।
विधि एवं न्याय मंत्रालय ने एक लिखित जवाब में बताया कि सरकार अभी तक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य जजों की पत्नियों की हवाई यात्रा का खर्च उठाती है, लेकिन इसके अलावा न्याय विभाग ने कोई और भत्ते मंजूर नहीं किए हैं। यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल की ओर से आरटीआई कानून के तहत दायर किए गए आवेदनों के बाद सामने आया है।
मंत्रालय की ओर से 13 जनवरी को दिए गए लिखित जवाब में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के महासचिव ने पिछले साल 12 से 18 अक्टूबर के बीच डबलिन और लंदन की छह दिवसीय यात्रा पर चीफ जस्टिस के साथ र्गई उनकी पत्नी को दैनिक भत्ता देने के लिए अनुमति देने का आग्रह किया है। मंत्रालय ने कहा कि अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार (विधि) और वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के साथ परामर्श कर इस मामले पर अध्ययन किया जा रहा है।
अग्रवाल ने अपने आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एवं अन्य जजों की देश या विदेश यात्रा के दौरान उनके साथ जाने वाली उनकी पत्नियों को दिए जाने वाले भत्तों (दैनिक भत्ते सहित) के बारे में मंत्रालय से जानकारी चाही थी। गौरतलब है कि अग्रवाल ने ही मंगलवार को चीफ जस्टिस के कार्यालय को आरटीआई की परिधि में लाने की कानूनी लड़ाई जीती थी।