चीनी, दलहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बेतहाशा बढ़ती कीमतों पर आखिरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी तरफ से पहल करने की नौबत आ गई। बुधवार को यहां उनकी अध्यक्षता में कीमतों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपी) की एक बैठक हुई जिसमें कीमतों का जायजा लिया गया। हर दिन बढ़ते दाम को काबू में करने के लिए प्रधानमंत्री ने 27 जनवरी को मुख्यमंत्रियों की बैठक भी बुलाई है।बैठक में लिये गये फैसलों की जानकारी देते हुए कृषि मंत्री शरद पवार ने पत्रकारों को बताया कि सरकार ने शून्य शुल्क पर व्हाइट शुगर की आयात अवधि को दिसंबर 2010 तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा खुले बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए पांच लाख टन गेहूं और चावल अगले दो महीने में खुले बाजार में बेचने का भी फैसला लिया गया है।
कीमत वृद्धि का ठीकरा राज्यों के सिर फोड़ते हुए पवार ने कहा कि राज्य सरकारें आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सुगम हो सके। उन्होंने बताया कि व्हाइट शुगर आयात की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2010 कर दी गई है तथा आयात पर सीमा भी नहीं होगी। सरकार शून्य शुल्क पर रॉ-शुगर (गैर-रिफाइंड चीनी) की आयात अवधि पहले ही बढ़ाकर 31 दिसंबर 2010 कर चुका है। कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई की आगामी आठ-दस दिनों में उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी। हालांकि चंद रोज पहले ही पवार ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा था कि वे कोई ज्योतिषी नहीं जो बता दें कि दाम कब तक घटेंगे।
पवार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि राज्य सरकार आयातित रॉ-शुगर को रिफाइन करने की अनुमति नहीं दे रही है। इसके कारण करीब नौ लाख टन रॉ-शुगर कांडला और मुंदरा बंदरगाह पर पड़ी हुई है। उन्होंने राज्यों से आयातित चीनी पर वैट व अन्य शुल्क न लगाने की मांग की। इसके अलावा चीनी और गन्ने के चोरी-छुपे निर्यात पर निगरानी के लिए गृह मंत्रालय बार्डर पर निगरानी बढ़ाएगा। कृषि मंत्री ने बताया कि आम जनता को महंगाई से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार खुले बाजार में दो लाख टन गेहूं और तीन लाख टन चावल अगले दो महीने में बेचेगी। इसके अलावा दो लाख टन गेहूं और एक लाख टन चावल राज्य सरकारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवंटन के लिए अलाट किया जाएगा।
इसके अलावा राज्य सरकारों से गेहूं और चावल का पूरा कोटा उठाने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अनाज आवंटन की समीक्षा भी करेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों नाफेड और एनसीसीएफ को पांच लाख टन गेहूं और दो लाख टन चावल आम उपभोक्ताओं को बेचने के लिए भी दिया जाएगा। उन्होंने राज्यों से सब्सिडी युक्त खाद्य तेलों के उठाव में तेजी लाने को भी कहा। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को दाल का आयात बढ़ाने के लिए कहा गया है।