Google
HomeDrishtikonEmotional Development Emotional Development

गणित और अंग्रेजी में छिपा है भविष्य

भारत में आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ-साथ अगर कम पढ़े-लिखे और गरीब देशवासियों का भी उद्धार हो जाए, तो कैसा रहेगा। आप तो यही कहेंगे, इससे अच्छी बात कोई नहीं हो सकती। हालांकि, इसके साथ ही आपके जेहन में यह सवाल भी आएगा कि यह कैसे संभव है। अगर एक छोटी-सी बात पर काफी गंभीरता से विचार किया जाए तो इस कल्पना को सच में तब्दील करना मुश्किल नहीं रह जाएगा। इस छोटी-सी बात का वास्ता गणित और अंग्रेजी के सही ज्ञान से है।



आज के जमाने में अगर कोई व्यक्ति ठीक-ठाक अंग्रेजी बोल ले और गणित पर उसकी अच्छी पकड़ हो, तो उसके लिए देश-विदेश में नौकरियों की कोई कमी नहीं है। मार्केटिंग एवं बीमा समेत कई क्षेत्रों में निचले स्तर की नौकरियों में केवल इन दोनों विषयों के अच्छे ज्ञान से ही काम चल जाता है और ठीक-ठाक कमाई भी हो जाती है। इन दोनों विषयों पर अच्छी पकड़ होने से लोग आत्मविश्वास से लबरेज रहते हैं। तथाकथित ऊंचे तबकों के लोगों से संपर्क साधकर अपनी कंपनी के कारोबार को बढ़ाने में भी उन्हें आसानी होती है। इस तरह हम देखते हैं कि गणित और अंग्रेजी के सही ज्ञान के फायदे ही फायदे हैं। अब सवाल यह उठता है कि आम जनता को इन दोनों विषयों में कैसे पारंगत किया जाए। इस समस्या का निदान भी आपके सामने है।



अगर देशभर में शहरों के साथ-साथ कस्बों और गांवों के भी तमाम स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर कक्षा छह तक केवल हिंदी, इंग्लिश और गणित के ही विषय पढ़ाए जाएं तो यह संभव हो सकता है। इससे सारे ही छात्रों का बेस मजबूत हो जाएगा और उन्हें आगे चलकर स्पोकन इंग्लिश के साथ-साथ गणित में भी पारंगत होने में मदद मिलेगी। सातवीं क्लास से दसवीं क्लास तक विज्ञान एवं भूगोल समेत अन्य सभी विषयों का ज्ञान दिया जाना चाहिए और इसके बाद छात्र-छात्राओं की रुचि के अनुरूप ही उन्हें साइंस अथवा आट्र्स या कॉमर्स की पढ़ाई करवानी चाहिए। यह बदलाव आने वाली पीढ़ी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड:
 

Advt