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छोटे शहरों में उड़ान के लिए सब्सिडी

दूरदराज के क्षेत्रों, पूवरेत्तर के राज्यों और छोटे मार्गे पर हवाई सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार छोटी एयरलाइनों को प्रोत्साहित करने के कई उपायों पर विचार कर रही है। ऐसी एयरलाइनों को सब्सिडी देना भी इनमें शामिल है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस बारे में एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव मंत्रालय की एक कमेटी ने तैयार किया है जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जा रहा है। वहां से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर ही आगे काम होगा। इस समय ट्रंक रूट पर तो पर्याप्त फ्लाइटें हैं, लेकिन दूरदराज के इलाकों और पूवरेत्तर के राज्यों को जोड़ने वाले मार्गे पर विमानों का टोटा है।

इन मार्गे पर कुछ कंपनियों की उड़ानें हैं भी तो सिर्फ नाम भर। सरकार चाहती है कि इन मार्गे पर भी कम से कम इतनी उड़ानें तो हों ही ताकि लोगों को कष्ट नहीं हो। एक अधिकारी के मुताबिक मंत्रालय छोटे विमानों के सहारे छोटे मार्गे पर हवाई सेवाएं उपलब्ध कराना चाहता है। समिति के प्रस्ताव के मुताबिक शिडुल्ड और नॉन शिडुल्ड एयरलाइनें इसके लिए कोड शेयरिंग भी कर सकती है। इससे दोनों ही एयरलाइनों को फायदा होगा। सूत्रों के मुताबिक ऐसे मार्गे पर सेवा शुरू करने के लिए छोटी एयरलाइनों को सब्सिडी देने का भी प्रस्ताव है। सब्सिडी का कुछ हिस्सा सरकार देगी, जबकि कुछ हिस्सा ट्रंक रूट पर उड़ान भरने वाली कंपनियां देंगी। नियमों के मुताबिक किसी भी एयरलाइन को ट्रंक रूट के अलावा गैर ट्रंक रूट पर भी अनिवार्य रूप से 10 फीसदी सेवाएं उपलब्ध करानी पड़ती हैं। अधिकारियों की मानें तो ऐसा करने के लिए कंपनियां आसानी से तैयार नहीं होती हैं। इसलिए सरकार इनसे राशि वसूल कर छोटी एयरलाइनों को उपलब्ध कराना चाहती है।

आर्थिक सुस्ती और एयरलाइनों में यात्रियों की संख्या घटने से बीते वर्ष सभी कंपनियों की हालत खस्ता रही। सभी एयरलाइनों की बैलेंस शीट को जोड़कर देखा जाए तो इस दौरान उनका कुल घाटा 8000 करोड़ रुपये था। इधर कुछ महीनों से यात्रियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इससे उत्साहित कंपनियां नए-नए मार्गे पर उड़ान शुरू करने की योजना बना रही हैं। यही नहीं, एमडीएलआर और जैगसन एयरलाइंस जैसी छोटी कंपनियां भी अब उड़ान शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। जैगसन एयरलाइंस श्रीनगर और लेह से लेकर पटना एवं रांची जैसे छोटे शहरों में भी सेवाएं उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। इसी तरह एमडीएलआर एयरलाइंस भी गैर ट्रंक मार्गे को प्राथमिकता दे रही है।





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