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निर्यात क्षेत्र के लिए नई खुशियां लाया नववर्ष

लंबे समय तक ग्लोबल वित्तीय संकट से जूझने वाले भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए नववर्ष अभिनव खुशियां लेकर आया है। इसे अभिनव इसलिए माना जाना चाहिए क्योंकि लगातार 13 महीनों से निर्यात में गिरावट दर्ज की जा रही थी। सुस्ती के इतने लंबे दौर के बाद नवंबर 2009 के दौरान भारतीय निर्यात में 18.2 प्रतिशत की खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान देश से निर्यात बढ़कर 13.19 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 11.16 अरब डॉलर के आंकड़े को ही छू पाया था।

इसके साथ ही दुनिया के सभी महत्वपूर्ण बाजारों में व्यापक मंदी छा जाने के चलते अक्टूबर 2008 से ही भारतीय निर्यात में गिरावट का जो दौर शुरू हुआ था उस पर अब विराम लग गया है। हालांकि, नवंबर 2009 में भारतीय निर्यात में बढ़ोतरी होने के बावजूद इस दौरान आयात गति नहीं पकड़ पाया। इस वजह से नवंबर 2009 के दौरान आयात 2.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22.88 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया। वैसे, आयात में गिरावट अब भी जारी रहने से फायदा यह हुआ है कि नवंबर 2009 के दौरान व्यापार घाटा कम होकर 9.69 अरब डॉलर रह गया।

वहीं, नवंबर 2008 में यह 12.32 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर विराजमान था। नवंबर 2009 के दौरान भी आयात में गिरावट दर्ज होने के बावजूद अक्टूबर 2009 के 15 फीसदी के मुकाबले यह बहुत कम है। इससे संकेत मिलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं। नवंबर 2009 के दौरान निर्यात में भले ही बढ़ोतरी दर्ज की गई हो, लेकिन इसमें बेस इफेक्ट (नवंबर 2008 में कम निर्यात) का भी योगदान रहा है।





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