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लैप्स पॉलिसियों को लेकर आईआरडीए का रुख सख्त

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[an error occurred while processing this directive]जीवन बीमा कंपनियों को अपने खातों में लैप्स पॉलिसियों के लिए जल्द ही ज्यादा डिस्क्लोजर (जानकारियां) देने पड़ सकते हैं। बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) ने जीवन बीमा कंपनियों से चालू तिमाही के लिए संभावित प्रीमियम के आंकड़े देने को कहा है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि देश में बड़ी संख्या में पॉलिसियां प्रीमियम नहीं देने के कारण बंद हो जाती हैं। फंड का कई बार इस्तेमाल नहीं हो पाता है और कंपनियां इसे तमाम खर्चो के नाम पर अपने इस्तेमाल में लाती हैं।

इस बात पर भी नजर रखी जा सकेगी कि किन कंपनियों की कितनी पॉलिसियां लैप्स हुई हैं और संबंधित फंड का कंपनियां क्या कर रही हैं। इससे पहले भी लैप्स पॉलिसी के फंड को लेकर कंपनियों के साथ आईआरडीए की लंबी चर्चा हुई थी, लेकिन उस समय इस मसले पर बात आगे नहीं बढ़ पाई थी। लिहाजा अब आईआरडीए ने कंपनियों को संभावित प्रीमियम के बारे में आंकड़े भेजने को कहा है। कंपनियों से कहा गया है कि जितनी पॉलिसियों का प्रीमियम बाकी है उसकी पूरी जानकारी आईआरडीए को दी जाए। जब प्रीमियम मिल जाता है तो कंपनियां इसकी जानकारी बीमा नियामक के पास भेजती ही हैं। इससे यह पता लग जाएगा कि कितनी पॉलिसियों का प्रीमियम नहीं मिला है। deepak.u@businessbhaskar.net





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