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चीनी ऑटो कंपोनेंट कंपनियों ने भारत पर गड़ाई नजर

चीन की ऑटो कंपोनेंट (कलपुर्जा) कंपनियां भारत को नए बाजार के रूप में देख रही हैं। भारतीय बाजार में बड़ी संभावनाओं के भांपते हुए ये कंपनियां यहां अपने पैर जमाने की कवायद में जुट गई हैं।दरअसल, यूरोप और अमेरिका में ऑटोमोबाइल उद्योग की खस्ता हालत के चलते ऑटो कलपुर्जे की मांग में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। यूरोपीय देशों और अमेरिका से कलपुर्जे की मांग में 40-60 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन दूसरी ओर 2009 की शुरूआत से ही भारत में ऑटो उद्योग रफ्तार पकड़ने लगा था। अगस्त 2009 से भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग ने फर्राटा भरना शुरू कर दिया। वित्त वर्ष 2009-10 के अंत तक यहां के ऑटोमोबाइल उद्योग में दहाई अंकों में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है। इस तथ्य को देखते हुए चीनी कंपनियां भारत की ओर रुख कर रही हैं।

ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्यूफैचर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) के प्रेसिडेंट और संधार टेक्नोलॉजीस लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर जयंत डवर ने बिजनेस भास्कर को बताया कि चीन की कलपुर्जा निर्माता कंपनियों के पास बहुत ज्यादा उत्पादन क्षमता है। विकसित देशों में ऑटोमोबाइल उद्योग की रफ्तार घटने से चीनी कंपनियों का निर्यात काफी घट गया है। ऐसे में चीनी कंपनियां भारत की ओर रुख कर सकती हैं।

डवर ने बताया कि भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग की जबरदस्त बढ़त को देखते हुए चीनी कंपनियां भारत में पैर जमाने की जुगत में हैं। इन कंपनियों के पास उत्पादन क्षमता की कोई कमी नहीं है। डवर ने बताया कि चीनी कंपनियां भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को लेकर कितनी उत्साहित हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार 10वें ऑटो एक्सपो में चीनी कंपनियों ने तीन गुना ज्यादा स्पेस बुक कराया है। इस बार चीनी कंपनियों ने 5,000 स्क्वायर मीटर जगह बुक कराई है। 10वें ऑटो एक्सपो में तकरीबन 1,000 भारतीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इस एक्सपो में हिस्सा लेने वाली चीनी कंपनियों की संख्या तकरीबन 100 है। इसके अलावा चीनी कंपनियां भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों से भी बातचीत कर रही हैं जिससे उन्हें भारत में ऑर्डर मिल सकें। rakshit.s@businessbhaskar.net





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