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भारतीय कंपनियां ढूंढ रही हैं कैंसर व डायबिटीज की दवा

देश में कैंसर और डायबिटीज की नई दवाओं की खोज में कई कंपनियां जुटी हुई हैं। इन बीमारियों के भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे मामलों को ध्यान में रखते हुए ही दवा कंपनियां इन दोनों बीमारियों के इलाज की दवा ढूंढने के लिए प्रमुखता से शोध कर रही हैं। नई दवा की खोज में 10 से 12 वषों का लंबा समय लगता है और इसमें काफी पूंजी का निवेश होता है। हालांकि, सबसे बड़ी बात यह है कि बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां भी भारतीय दवा कंपनियों द्वारा गहन शोध के बूते विकसित की जा रही दवाओं को खरीदने के लिए तत्पर हैं। भारतीय कंपनियों ने नई दवाओं पर शोध के लिए अपने बजट में भी तकरीबन 17 फीसदी का इजाफा किया है।

पिरामल लाइफसाइंसेज लिमिटेड कैंसर के इलाज के लिए चार नए मौलिक्यूल पर शोध कर रही है। पिरामल की निदेशक डॉ.स्वाति पिरामल ने बताया कि सफेद रक्त कोशिकाओं से संबंधित मल्टीपल माइलोमा के इलाज के लिए खोजी गई दवा का फेज-2 ट्रायल खत्म हो गया है। कंपनी रिसर्च के लिए अगले दो वषों में 200 करोड़ रुपये निवेश करेगी। उन्होंने बताया कि कैंसरग्रस्त कोशिकाओं में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि के लिए जिम्मेदार एंजाइम का पता चल गया है और इसकी रोकथाम के लिए कंपनी ने पी276 मोलिक्यूल विकसित किया है। पी276 का भारत समेत अमेरिका में ट्रायल चल रहा है। डॉ. पिरामल का कहना है कि इसके अलावा डायबिटीज के इलाज के लिए पी2202 मौलिक्यूल पर काम चल रहा है। इसे दवा कंपनी एली लिली और मर्क के सहयोग से तैयार किया जा रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि 2011 तक दवाएं बाजार में आ जाएंगी।

जर्मनी की कंपनी मर्क भारतीय दवा कंपनी ग्लेनमार्क द्वारा विकसित डायबिटीज की दवा के अधिकार पाने के लिए तकरीबन 1,150 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। ग्लेनमार्क के प्रबंध निदेशक ग्लेन सलदाना का कहना है कि कंपनी द्वारा तैयार की जा रही डायबिटीज की दवा का फिलहाल फेज-2 ट्रायल चल रहा है। उनका कहना है कि मर्क उनकी कंपनी को करीब 144 करोड़ रुपये शुरुआत में देगी। ग्लेनमार्क ने रिसर्च के लिए करीब 80 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

इसके अलावा रैनबैक्सी, डॉ. रेड्डीज लैब, कैडिला, भारत बायोटेक आदि कंपनियां भी नए मौलिक्यूल विकसित करने के लिए निवेश कर रही हैं। पहली बार देश की बड़ी दवा कंपनियों ने अपने बजट में लगभग 17 फीसदी की बढ़ोतरी की है। रैनबैक्सी ने सबसे अधिक 471.38 करोड़ रुपये आरएंडडी पर निवेश किए हैं। डॉ. रेड्डीज ने आरएंडडी पर 421.20 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वर्ष 2008-09 में देश की प्रमुख 25 दवा कंपनियों का आरएंडडी बजट तकरीबन 3210 करोड़ का रहा, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 2747 करोड़ था।anurag.sharma@businessbhaskar.net





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