राज्य परिवहन निगमों की हालात सुधारने को केंद्र सरकार की पहल
शिशिर चौरसिया नई दिल्ली
Thursday, Dec 24th, 2009, 3:55 am [IST]
सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में आर्थिक रूप से खस्ता हो रहे राज्य पथ परिवहन निगमों (एसटीसी) को मजबूत करने के लिए केन्द्रीय स्तर पर एक पहल हो रही है। इस तरह की व्यवस्था हो रही है कि निगमों को रियायती टिकट जारी करने में जो घाटा होगा, उसे संबंधित राज्य सरकार पूरा कर देगी। आजादी के बाद हर राज्य में सुगम बस सेवा उपलब्ध कराने के लिए सड़क परिवहन निगम कानून 1950 बना था। इसी के मुताबिक करीब करीब हर राज्य में एसटीसी की स्थापना हुई। कई राज्यों में तो एक से ज्यादा एसटीसी भी है जिनमें से कई तो सिर्फ एक मेट्रोपोलिटन क्षेत्र तक ही सीमित हैं। इनकी शुरुआत तो बड़े धूम धड़ाके से हुई पर कुप्रबंधन का शिकार होकर खस्ताहाल उपक्रम बन गई। केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय के मुताबिक इस समय देश में 53 सड़क परिवहन निगम हैं जिनमें से मात्र आठ निगम फायदे में हैं जबकि एक निगम नो प्रोफिट नो लॉस की स्थिति तक पहुंच पाया। जानकारों का कहना है कि रियायती टिकट देने की सरकारी योजना के कारण निगमों पर काफी भार पड़ता है।
इसलिए ये घाटे में रहती हैं। लगभग सभी राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों, अपंगों, महिलाओं, स्वतंत्रता सेनानियों, पत्रकारों, शहीदों की विधवाओं आदि को रियायती पास/टिकट जारी किया जाता है। कुछ राज्यों में रक्षा बंधन के अवसर पर महिलाओं को मुफ्त यात्रा कराने का भी चलन शुरू हुआ है। राज्य परिवहन निगमों की माली हालत सुधारने के लिए अब केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय स्तर पर ही काम हो रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे नियम बनाये जा रहे हैं कि एसटीसी को रियायती टिकट बेचने पर उसकी भरपायी मिलेगी। व्यवस्था ऐसी होगी कि जो भी टिकट पास बिकेगी, उसकी गिनती पूरे किराये पर बिके टिकटों के समान होगी। रियायत देने से एसटीसी को जितना घाटा होगा, उसकी भरपायी राज्य सरकार द्वारा कर दी जाएगी। इस तरह से सामाजिक दायित्वों का भी निर्वाह हो जाएगा और निगमों का घाटा भी नहीं होगा। shishir.c@businessbhaskar.net