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मुद्दों पर भारी लिब्रहान रिपोर्ट

गन्ना मूल्य और महंगाई जैसे मुद्दों को संसद के शीतकालीन सत्र में पुरजोर ढंग से उठाने वाला विपक्ष अब लिब्रहान रिपोर्ट पर ठहर गया है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को गर्मजोशी से उठाने की तैयारी में है वहीं सरकार भी कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा कराने से बचने का प्रयास करती नजर आ रही है। लोकसभा में मंगलवार और बुधवार को लिब्रहान रिपोर्ट पर चर्चा होगी। समझा जा रहा है कि चर्चा के दौरान हंगामा होना भी लाजिमी है। इसके अलावा राज्यसभा में इस रिपोर्ट पर 7 दिसंबर को चर्चा होगी। कांग्रेस और भाजपा सहित कई प्रमुख दलों के नेताओं के रिपोर्ट पर होने वाली चर्चा में हिस्सा लेने की उम्मीद है और इस तरह संसद के दोनो सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा गर्म होने की संभावना है।

लोकसभा में भाजपा की ओर से पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली जहां चर्चा की शुरुआत करेंगे वहीं कांग्रेस ने अपने वक्ताओं की सूची तय नहीं की है। लोकसभा और राज्यसभा में रिपोर्ट पर चर्चा होने के बाद मचने वाले हंगामे से कई अन्य मुद्दों पर चर्चा हो पाना संभव नहीं रहेगा। ऐसे में कई महत्वपूर्ण विधेयक जो कि इस सत्र में लाए जाने थे उन पर भी विपक्ष किसी प्रकार का दबाव नहीं बना पा रहा है। समझा जा रहा है कि विपक्ष की बेरुखी से कई महत्वपूर्ण विधेयक इस बार भी पेश नहीं हो पाएंगे। लंबे अरसे से चर्चा के केंद्र में रहे महिला आरक्षण विधेयक पर तो कोई राजनीतिक दल चर्चा ही नहीं कर रहा है। इसके अलावा बीमा क्षेत्र और पेंशन फंड सहित कई सुधार विधेयक इस सत्र में पेश किए जाने हैं लेकिन विपक्ष की रणनीति भांप सरकार भी मौन साधे हुए है। गन्ना संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष की एकजुटता से संकट में घिरी सरकार ने लिब्रहान रिपोर्ट पेश कर विपक्ष को मुद्दा तो दे दिया लेकिन अन्य मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है।

विपक्ष पहले ही आरोप लगा रहा है कि गन्ना मुद्दे के दौरान बनी विपक्षी एकता सत्तापक्ष को रास नहीं आ रही थी और इस एकता को तोड़ने के इरादे से लिब्रहान रिपोर्ट लीक की गई। भाजपा नेता सुषमा स्वराज का कहना है कि सरकार को विपक्षी एकता पसंद नहीं है और महंगाई और गन्ना मूल्य जैसे मुद्दों पर विपक्ष का ध्यान बंटाकर एकजुट होने नहीं देना चाहती। हालांकि सत्तारुढ़ कांग्रेस इन आरोपों को नकार रही है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी का कहना है कि सरकार कुछ भी ऐसा नहीं कर रही है जिससे कि विपक्ष का ध्यान हटे। उधर कर्नाटक के बेल्लारी के रड्डी बंधुओं की खनन क्षेत्र में बढ़ रहे प्रभाव को रोकने के लिए माकपा, भाकपा के अलावा टीडीपी, रालोद ने संयुक्त रूप से संसद में आवाज उठाने की तैयारी की है। रालोद प्रमुख अजीत सिंह ने कहा कि जिस प्रकार से रड्डी बंधुओं के पास बेनामी संपत्ति है उसका खुलासा किया जाना चाहिए। इन दलों के नेताओं ने एक स्वर में रड्डी बंधुओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। समझा जा रहा है कि शीतकालीन सत्र में इन दलों के सांसद इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएंगे।

लेफ्ट-तृणमूल में फिर होगी तकरारनई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की स्थिति को लेकर संसद में वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस के बीच फिर तकरार होने की आशंका जताई जा रही है। तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी सांसदों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी सूरत में पश्चिम बंगाल के मुद्दे को संसद में उठाते रहें। ममता के इस निर्देश के बाद तृणमूल सांसद फिर तकरार करने के मूड में दिखाई पड़ रहे हैं। ममता ने केंद्र सरकार के प्रति भी अपने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा है कि गृहमंत्री पी. चिदंबरम पश्चिम बंगाल आकर हालात देंखे तब पता चलेगा कि राज्य में क्या हालात क्या है। ममता के इस तेवर को पार्टी के सांसद संसद सत्र में जोर-शोर से उठाएंगे।





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