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लिब्रहान लीक पर सियासत में उबाल

लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने में हुई देरी और अब रिपोर्ट के लीक होने की खबर के साथ संसद में सोमवार को जोरदार हंगामा हुआ। सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है। लंबे अरसे बाद, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को दहाड़ने का मौका मिला। उन्होंने रिपोर्ट लीक होने के लिए सीधे सरकार को दोषी ठहराया। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी और सरकार में अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ आज देर शाम विचार-विमर्श किया। गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने साफ शब्दों में कहा कि रिपोर्ट के कथित त्नलीकत्न किए जाने में उनके मंत्रालय के किसी व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं है। चिदम्बरम ने साफ किया कि सरकार संसद के इसी सत्र में आयोग की रिपोर्ट को कार्रवाई-रपट(एटीआर)के साथ पेश कर देगी।

कांग्रेस अध्यक्ष बुलाई गई शीर्ष कांग्रेस नेताओं की बैठक में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आकस्मिक बैठक करने का निर्णय हुआ। समझा जाता है कि बैठक में एटीआर से जुड़े मुद्दे पर फैसला लिया जाएगा। इस बात की भी संभावना है कि एटीआर के साथ लिब्रहान रिपोर्ट भी सदन में यथाशीध्र पेश कर दी जाए।

रिपोर्ट के कथित अंश जो प्रकाशित हुए हैं, उनमें पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम भी बाबरी ध्वंस-कांड और उससे जुड़े प्रकरण के लिए त्नजिम्मेदार लोगोंत्न के तौर पर सामने आया है। आयोग के वकील रहे अनुपम गुप्ता का कहना है कि उनकी जानकारी में वाजपेयी का नाम आयोग की कार्रवाई में कभी आया ही नहीं था।

एक निजी टीवी चैनल के अनुसार गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि आयोग ने वाजपेयी को सम्मन भी नहीं भेजा। रिपोर्ट में अटल का नाम आने संबंधी खबरों के बाद आडवाणी ने रिपोर्ट को तत्काल पेश करने की मांग की । उल्लेखनीय है कि एक अंग्रेजी दैनिक ने बाबरी विध्वंस पर लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट के लीक करने का दावा किया, जिसे लेकर सोमवार को संसद के दोनो सदनों में जमकर हंगामा हुआ और कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को जिम्मेवार ठहराया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उमा भारती, विनय कटियार सहित कई नेताओं को दोषी माना है।

इस मामले में वाजपेयी का नाम जहां पहली बार सामने आया है, वहीं आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव सरकार को क्लीन चिट दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने केंद्र से हस्तक्षेप की सिफारिश नहीं की थी, ऐसे में केंद्र सरकार कुछ भी नहीं कर सकती थी। मीडिया में आई रिपोर्ट के बाद जहां विपक्ष पूरा आक्रामक हो गया वहीं सरकार को भी सफाई देना पड़ रहा है। झारखंड विधानसभा चुनाव से पूर्व लीक रिपोर्ट को लेकर सियासत भी गरम हो गई है। माकपा नेता सीताराम येचुरी का कहना है कि संसद सत्र के दौरान किसी अखबार में इस तरह की रिपोर्ट लीक होना सदन के विशेषाधिकार का हनन है। भाकपा नेता डी राजा इस मामले की जांच सभापति से कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं समाजवादी पार्टी ने रिपोर्ट को तत्काल सदन में पेश किए जाने की मांग की है ताकि इस मुद्दे पर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न हो। बसपा के दारा सिंह चौहान, बीजद के अजरुन चरण सेठी ने भी रिपोर्ट तत्काल पेश किए जाने की मांग की है।





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