भारतीय जनता पार्टी के बड़े दिग्गज अब कल्याण सिंह और उमा भारती की त्नघर-वापसीत्न के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो गए हैं। पर यह सीधे नहीं, वाया-एनडीए होगी। उच्चस्थ सूत्रों के मुताबिक भाजपा के रणनीतिकार चाहते हैं कि कल्याण सिंह पहले उमा भारती के साथ उनकी पार्टी-भारतीय जनशक्ति (भाजश) में आएं और भाजश फिर एनडीए का घटक बने। उमा भारती ने कुछ समय पहले एनडीए के संयोजक शरद यादव और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को लिखे पत्र में दोनों एनडीए नेताओं से अपनी पार्टी को एनडीए का घटक बनाने का अनुरोध कर चुकी हैं। फिरोजाबाद संसदीय उपचुनाव के बाद सपा के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से रूठ कर फिर भारतीय जनता पार्टी की तरफ हाथ बढ़ाते कल्याण का राजनीतिक कल्याण भी इसी रास्ते संभव हो सकता है।
महाराष्ट्र और हरियाणा की चुनावी हार, उत्तर प्रदेश और बिहार के उपचुनावों में मिली शिकस्त के बाद भाजपा के पास अब कल्याण और उमा जैसे अपने पुराने नेताओं की लगातार उपेक्षा करने की हैसियत नहीं रह गई है। वैसे भी भाजपा के पास पिछड़े वर्ग से आने वाले असरदार नेताओं की कमी महसूस की जाने लगी है। शीर्ष पदों पर ज्यादातर ब्रा±मण ही काबिज हैं। राजनाथ सिंह के बाद अगर भाजपा के अध्यक्ष के तौर पर नितिन गडकरी की नियुक्ति होती है तो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ब्रा±मणमय हो जाएगा। ऐसे में कुछ पिछड़े वर्ग के नेताओं की भी उसे दरकरार होगी। बताया जाता है कि इन्हीं कारणों से कल्याण-उमा के बारे में नेतृत्व का रवैया अब बदला-बदला सा है। समझा जाता है कि सांगठनिक चुनावों के बाद पार्टी इन नेताओं को औपचारिक तौर पर पार्टी में वापस लेने की तैयारी करेगी।
कल्याण सिंह ने जिस प्रकार भाजपा की तारीफ में कसीदे पढ़ना शुरू कर दिया है और उमा भारती ने चिट्ठी लिखकर एनडीए का हिस्सा बनने की मंशा जाहिर की है, उसे देखते हुए भाजपा का एक बड़ा वर्ग इस बात का समर्थन कर रहा है कि पहले इन दोनो नेताओं को एनडीए का हिस्सा बनाया जाए, उसके बाद पार्टी में शामिल किया जाए। कल्याण सिंह की वापसी को लेकर कई भाजपा नेता आश्वस्त नजर आ रहे हैं। रविवार को पार्टी महासचिव विनय कटियार ने सकारात्मक संदेश दिया। उसके बाद उत्तर प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कल्याण से मिलकर भाजपा को मजबूत करने की चर्चा करने में जुट गए। वरिष्ठ नेता अरुण जेटली से जब इन नेताओं की वापसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इतना कहा कि अभी पार्टी के अंदर चर्चा नहीं हुई है लेकिन आशय साफ है कि दोनो नेताओं की वापसी को लेकर चर्चा होनी है। सूत्रों के मुताबिक लालकृष्ण आडवाणी के विपक्ष का नेता पद छोड़ने के बाद सुषमा स्वराज उनकी उत्तराधिकारी हो सकती हैं। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी इसके पक्ष में हैं। इस प्रस्ताव पर नाराजगी सिर्फ मुरली मनोहर जोशी की है।
गडकरी को स्वीकार कर लेंगे दिल्ली के चार नई दिल्ली। भाजपा के नए अध्यक्ष के तौर पर नितिन गडकरी का नाम उभरने के बाद अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हुए दिल्ली स्थित चार प्रमुख नेता अब उन्हें नेता के तौर पर स्वीकारने के लिए तैयार दिख रहे हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अध्यक्ष पद के लिए अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू और अनंत कुमार के नाम को अस्वीकार किए जाने के बाद यह चर्चाएं तेज हो गईं कि कौन होगा पार्टी का नया अध्यक्ष।़ भागवत ने यह भी कहा था कि नया अध्यक्ष दिल्ली से नहीं होगा। उसके बाद गडकरी का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया। बताया जा रहा है कि संघ के दबाव में आकर भाजपा नेता भी गडकरी के नाम को स्वीकार करते हुए दिख रहे हैं। पहले गडकरी के नाम को लेकर पार्टी के अंदर काफी विरोध था।