सरकार की 60 सरकारी उपक्रमों के विनिवेश की अहम योजना
बिजनेस भास्कर नई दिल्ली
Saturday, November 14, 2009 03:25 [IST]
सरकार देश के लाभ अर्जित करने वाले लगभग 60 सरकारी उपक्रमों (सीपीएसयू) के विनिवेश की योजना बना रही है। सरकार का विनिवेश विभाग इसके लिए विभिन्न सीपीएसयू से संबंधित मंत्रालयों से बातचीत कर रहा है। इन सीपीएसयू में बीएसएनएल, सेल, कोल इंडिया आदि शामिल हैं। सरकार इन सीपीएसयू में सरकारी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेगी और उस धनराशि को देश के सामाजिक क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने पर खर्च करगी। इस प्रक्रिया से कितनी धनराशि एकत्र होगी और पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, सरकार ने फिलहाल इसका अनुमान नहीं लगाया है।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले दिनों कहा था कि जब देश में शेयर बाजार का माहौल अनुकूल हो जाएगा तो सरकार इन कंपनियों के विनिवेश पर विचार कर सकती है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि लाभ में रहने वाली गैर-सूचीबद्ध कंपनियों को पूंजी बाजार में प्रवेश करना चाहिए तथा लाभ अर्जित करने वाली और सूचीबद्ध पीएसयू कंपनियों को अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी को कम से कम 10 फीसदी तक बढ़ाना चाहिए। विनिवेश सचिव सुनील मित्रा ने शुक्रवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बताया कि देश में फिलहाल 10 ऐसी सूचीबद्ध पीएसयू कंपनियां हैं जिनमें सार्वजनिक हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम है और लगभग 50 ऐसी लाभदायक पीएसयू कंपनियां हैं जो गैर-सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हमारी इन 60 कंपनियों के संबंधित मंत्रालयों के साथ बातचीत चल रही है।
इसमें कितना समय लगेगा, इस बार में कहना कठिन है। उन्होंने बताया कि फिलहाल बाजार की स्थिति ठीक है लेकिन इसका कोई बेंचमार्क नहीं है कि सेंसेक्स के किस स्तर पर पहुंचने के बाद इसे बेहद मजबूत बाजार करार दिया जा सके। देश में फिलहाल 10 ऐसी लाभदायक सूचीबद्ध पीएसयू कंपनियां हैं जिनमें सार्वजनिक हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम हैं। ये कंपनियां हैं-एमएमटीसी, नेवेली लिग्नाइट कारपोरशन, इंजीनियर्स इंडिया, एसटीसी, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स, नेशनल फर्टिलाइजर्स और एंड्रियू यूले। गैर-सूचीबद्ध लेकिन लाभदायक सीपीएसयू में बीएसएनएल और कोल इंडिया शामिल है।
ममता बनर्जी और डीएमके के विरोध के कारण पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की कंपनियों को प्राथमिकता में नहीं रखने के बारे में मित्रा ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक इस तरह के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। मित्रा ने कहा है कि इन कंपनियों की लिस्टिंग से शेयरधारकों के लिए मूल्य का नया आयाम खुलेगा। अंतरमंत्रालयी बातचीत के जरिए संभावित कंपनियों को खोजा जा रहा है। विनिवेश का फैसला हर कंपनी की क्षमता और कामकाज के आधार पर किया जाएगा। सरकार रिटेल निवेशकों को कुछ रियायतें भी देने के बारे में विचार कर रही है ताकि आम निवेशकों को भागीदार बनाया जा सके। रिटेल निवेशकों को फाओ आन पब्लिक इश्यू से फायदा होगा, क्योंकि पहले से लिस्टेड कंपनियों के शेयर रिटेल निवेशकों को डिस्काउंट पर मिलेंगे। एनटीपीसी, आईईसी और सतलज जल विद्युत का विनिवेश 2009-10 में ही किया जाएगा।एनटीपीसी में पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 8,100 करोड़ रुपए मिलेंगे।
स्कोप ने दी आईपीओ की बाढ़ से बचने की नसीहतनई दिल्ली। जहां एक तरफ सरकार पीएसई के विनिवेश की तैयारी कर रही है, वहीं सरकारी क्षेत्र की इन कंपनियों का सर्वोच्च चैंबर स्कोप ने इन्हें आईपीओ से बाजार को पाटने के खिलाफ सचेत किया है। लाभ अर्जित करने वाली सभी पीएसई को सूचीबद्ध करने के सरकारी निर्णय का स्वागत करते हुए स्कोप ने इन कंपनियों के चीफ एक्जीक्यूटिव को अपनी पीएसई को अधिक से अधिक बाजारोन्मुख बनाने के लिए जरूरी उपाय करने की भी सलाह दी। (प्रेट्र)