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भागवत की बयानबाजी से ढीले पड़े संघ-भाजपा के तार

संघ और भाजपा के बीच सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत भले ही कहें कि संघ नेतृत्व भाजपा को सिर्फ सलाह देता है लेकिन भागवत के ताजा साक्षात्कार ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है। संघ प्रमुख के रवैये से नाराज भाजपा भले ही खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं है पर संघ की दखलंदाजी को लेकर पार्टी में सुगबुगी शुरू हो गई है।

हाल ही में संघ प्रमुख के साक्षात्कार को लेकर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति की थी, जिसमें भागवत ने कहा कि नया भाजपा अध्यक्ष दिल्ली से नहीं होगा। यानी पार्टी के चार प्रमुख नेताओं अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू या अनंत कुमार की जगह कोई सूबाई नेता भाजपा अध्यक्ष बनेगा। संघ प्रमुख ने इस बात की पुष्टि यह कहकर कर दी कि भाजपा नेताओं ने ही उन्हें इस बात की जानकारी दी है। संघ और भाजपा में पैदा हुई तल्खी के बीच भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बुधवार को संघ प्रमुख से मुलाकात की। डेढ़ घंटे की इस मुलाकात में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें नए भाजपा अध्यक्ष का नाम भी शामिल था। इस मुलाकात के बाद राजनाथ विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी मिले।

सूत्रों का कहना है कि संघ प्रमुख से चर्चा के दौरान राजनाथ ने विपक्ष के नेता के नाम को लेकर भी चर्चा की। अध्यक्ष के चुनाव के बाद विपक्ष के नेता को लेकर भी भाजपा में घमासान चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि संघ प्रमुख से राजनाथ की मुलाकात के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने भी भागवत से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि जेटली ने संघ प्रमुख से साफ शब्दों में कहा है कि वह इस प्रकार की सार्वजनिक बयानबाजी न करें कि जिससे कि कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाए। संघ-भाजपा के बीच किसी प्रकार के टकराव न होने का हवाला देते हुए जेटली की इस मुलाकात को भी काफी अहम माना जा रहा है। संघ के रिमोर्ट कंट्रोल की वजह से भाजपा के कई नेता दुखी है लेकिन वह खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि अगर इस प्रकार की बयानबाजी होती है तो पार्टी व संघ के बीच टकराव का संदेश जाएगा और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा।





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