महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार बनाने की गुत्थी और उलझती जा रही है। मंगलवार को एनसीपी नेताओं के अलग-अलग बयानों से कांग्रेस में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जबकि एनसीपी दबाव बनाए हुए है कि सूबे में सरकार 1999 के फामरूले के आधार पर ही बनेगी। मंगलवार को राज्यपाल एससी जमीर ने मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल से अलग-अलग मुलाकात कर सरकार गठन की प्रक्रिया जाननी चाही लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक उत्तर नहीं मिल पाया है। उधर भाजपा-शिवसेना ने सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग को लेकर बुधवार को राज्यपाल से मिलने की बात कही है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद भुजबल ने साफ तौर पर कह दिया कि कांग्रेस अकेली सरकार बनाए, एनसीपी समझौता होने तक शामिल नहीं होगी और बाहर से समर्थन देगी। भुजबल ने साफ तौर पर कहा कि कुछ मुद्दों को लेकर कांग्रेस से मतभेद कायम हैं लेकिन शीघ्र सुलझने के आसार है। वहीं एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि एनसीपी सरकार के साथ है और बाहर से समर्थन देने का कोई सवाल नहीं उठता। पटेल ने कहा कि राज्य के नेता आपस में वार्ता कर मामले को जल्द सुलझा लेंगे। लेकिन कांग्रेस एनसीपी के विरोधाभाषी बयानों से असमंजस में हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे का कहना है कि यह व्यवहारिक नहीं है और सरकार गठन की प्रक्रिया में एनसीपी बाहर समर्थन देगी तो उचित नहीं होगा। एनसीपी 1999 के फामरूले पर अमल करने की बात कर रही है। एनसीपी का तर्क है कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस का मुख्यमंत्री होगा जबकि गृह, वित्त और लोकनिर्माण जैसे विभाग एनसीपी के खाते में होने चाहिए। बताया जा रहा है कि इन पदों को लेकर दोनो दलों के बीच में कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। मजे की बात यह है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस पूरे मसले पर खामोश है।