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महाराष्ट्र
में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के चयन के बाद कांग्रेस और एनसीपी में मंत्री पद को लेकर तनातनी जारी है। दोनो दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही मंत्रणा के बावजूद अभी तक मंत्री पद के बंटवारे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। एनसीपी ने वैसे भी कांग्रेस को चेतावनी दी है कि अगर सम्मानजनक तरीके से मंत्री पद का बंटवारा नहीं होगा तो गठबंधन में दरार पड़ सकती है। दोनो दलों के प्रमुख नेताओं के बीच मंत्रणा का दौर जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक बुधवार को भी मंत्री पद के बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। वर्ष 2004 के चुनाव में महज दो सीटें कम होने पर एनसीपी ने मुख्यमंत्री पद के एवज में कांग्रेस से वन, कामगार और पर्यावरण जैसे 3 विभाग ले लिए थे। इस बार कांग्रेस को 82 और एनसीपी को 62 सीटें मिली तो कांग्रेस ने बयानबाजी शुरू कर दिया कि एनसीपी को कम सीटें दी जाएगी। लेकिन सरकार चलाने के लिए कांग्रेस को एनसीपी के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस चाहती है कि मुख्यमंत्री पद सहित 25 मंत्री पद मिले, जबकि एनसीपी का तर्क है कि 22 मंत्री पद लेकर कांग्रेस 1999 के फामरूले पर अमल करे।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस मसले पर पूरी तरह से खामोश हैं लेकिन उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल का जिस तरह से बयान आ रहा है, समझा जा रहा है कि दोनो दलों के बीच तनातनी का खेल जारी है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस 1999 के फामरूले पर तैयार होती दिख रही है, लेकिन सूबे के कई नेता एनसीपी के दबाव में नहीं आने की बात कहकर केंद्रीय नेतृत्व को सकते में डाले हुए हैं।