भारत और चीन थाईलैंड में करेंगे सीमा विवाद पर वार्ता
एजेंसी बीजिंग/नई दिल्ली
Thursday, October 22, 2009 02:47 [IST]
भारत और चीन के बीच चल रहे वाकयुद्ध के बीच भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ इस सप्ताह थाइलैंड में होने जा रहे आसियान सम्मेलन के अवसर सीमा विवाद समेत अहम मसलों पर वार्ता करेंगे।
इस बीच भारत ने बुधवार को विश्वास जताया कि सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सीमा के संबंध में इस तरह की बातें अचानक नहीं आई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें पहले भी की गई हैं, क्योंकि चीन ने 1914 के समय से ही मैकमोहन रेखा को स्वीकार नहीं किया। हाल के दिनों में इस मामले में चीन का रुख सख्त रहने के मसले पर मुखर्जी ने इससे असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा कि चीन की टिप्पणी पर हमारी प्रतिक्रिया संतुलित होनी चाहिए। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री के अरुणाचल प्रदेश जाने के बारे में चीन ने पहली बार टिप्पणी नहीं की है। चीन की इस टिप्पणी के बाद मैं वहां गया था। वहां से आने के बाद मैंने कहा था कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है।
चीन के साथ सीमा से जुड़े प्रश्नों को सुलझाने की संभावना पर मुखर्जी ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि बातचीत के जरिए सभी विवादों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहली बार जब वह तवांग गए थे तो तब भी चीन के कुछ समाचार पत्रों ने अपनी खबरों में कहा था कि भारत के विदेश मंत्री दक्षिणी तिब्बत की यात्रा पर गए थे। भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर अचानक आई कड़वाहट के कारण बताते हुए मुखर्जी ने कहा, मैं कहूंगा कि चीन की यह प्रतिक्रिया अचानक नहीं आई है, 1914 के बाद से चीन ने कभी भी मैकमोहन रेखा को स्वीकार ही नहीं किया। अरुणाचल प्रदेश में चीन के सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि उपनिवेशवादी काल से ही यह राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है।