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राजस्थान
की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राज्य के नेता प्रतिपक्ष से हटाने के मामले में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। गुरुवार को पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में भी राजे को हटाने के मामले में कोई फैसला नहीं हो पाया। मजेदार बात तो यह है कि बोर्ड की बैठक का मुद्दा ही राजे को पद से हटाए जाने को लेकर था, लेकिन तीन घंटे के बाद भी फैसला नहीं लिया जा सका। सूत्रों का कहना है कि अब बोर्ड की 22 अक्टूबर को होने वाली अगली बैठक में विचार किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि राज्य में 7 नवंबर को कुछ सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होना है इसलिए फिलहाल मामले को टाल दिया गया है। लेकिन पिछले तीन माह से राजे को हटाए जाने की जो मुहिम पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शुरू की, वह सिरे नहीं चढ़ पाई है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष के हर दांव को भांप राजे अपने पद पर बने रहने के लिए अडिग हैं। राजे केंद्रीय नेतृत्व द्वारा बुलाए जाने के बावजूद दिल्ली नहीं आयीं। राजे ने यह कहकर आने से इंकार कर दिया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू विदेश में है।
नायडू को उनसे इस्तीफे के बारे में चर्चा करने की जिम्मेवारी सौंपी गई है। इससे पूर्व भी राजे और नायडू के बीच तय मुलाकात के बावजूद राजे ने अपने बेटे दुष्यंत सिंह को मिलने के लिए भेज दिया था। सूत्रों का कहना है कि राजे कोई न कोई बहाना बनाकर मामले को और टालना चाहती हैं। इस साल के अंत तक पार्टी अध्यक्ष का चुनाव होना है और यह तय है कि राजनाथ की जगह कोई नया चेहरा पार्टी की कमान संभालेगा। ऐसे में राजे के दांव के आगे पार्टी के वरिष्ठ नेता धराशाही नजर आ रहे हैं।