इसरो ने 20 मिनट में छोड़े ओशनसेट-2 सहित सात उपग्रह
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Thursday, September 24, 2009 04:48 [IST]
भारत ने घरेलू विकसित रॉकेट पीएसएलवी के 15वीं बार सफल प्रक्षेपण के साथ ही ओशनसैट-2 और छह नैनो यूरोपीय सेटेलाइट कक्षा में स्थापित कर दिए। अपने पहले मानवरहित चंद्र अभियान के समय से पहले खत्म हो जाने से विचलित हुए बगैर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने 20 मिनट के अंतराल में ही सात उपग्रह को कक्षा में स्थापित कर बड़ी उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही अरबों डॉलर के अंतरिक्ष बाजार में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में अपनी उभरती क्षमता को भारत ने साबित कर दिखाया है। इसरो के पीएसएलवी-सी 14 से देश के 16वें दूरसंवेदी और 960 किलो वजनी उपग्रह ओशन मानीटरिंग सेटेलाइट (ओशनसेट-2) छोड़ा गया। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ओशनसेट-2 के सफल प्रक्षेपण के लिए यह कहते हुए इसरो की टीम को मुबारकबाद दिया कि यह समुद्र की समझ हासिल करने की एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।
पृथ्वी से 720 किलोमीटर दूर स्थित कक्षा में यह उपग्रह 1200 सेकंड में अपनी कक्षा में स्थापित हो गया। 51 घंटे की उल्टी गिनती के बाद 44.4 मीटर लंबे और चार चरण वाले अंतरिक्ष यान पीएसएलवी सी14 यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के अपने सफर पर रवाना हुआ। पीएसएलवी सी14 ने एक के बाद एक सभी सातो उपग्रह कक्षा में स्थापित कर दिए। आसमान साफ था और बुधवार सुबह 11.55 बजे जैसे ही पीएसएलवी ने पूरे आनबान के साथ आकाश का रुख किया वैज्ञानिकों में हषरेल्लास की लहर फैल गई। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए वहां मौजूद थे। ओशनसेट देश का 16वां दूरसंवेदी उपग्रह है और यह मछली पकड़ने के संभावित क्षेत्रों की निशानदेही करने के साथ ही समुद्र की स्थिति की भविष्यवाणी करेगा और तटीय क्षेत्रों के अध्ययन में मदद करेगा। यह मौसम की भविष्यवाणी और जलवायु अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण सूचनाएं देगा। कक्षा में स्थापना के इस सफर में ओशनसेट के साथ छह नैनो उपग्रहों की एक श्रंखला भी थी।
सफल प्रक्षेपण के तुरंत बाद अभियान केंद्र में मौजूद अंसारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक एमजीके मेनन ने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाइयां दीं। अंतरिक्ष के इस सफर में ओशनसेट के साथ दो जर्मन रूबिन नैनो उपग्रहों के अलावा चार क्यूबसेट भी थे। इनमें बर्लिन टेक्नीकल यूनिवर्सिटी से निर्मित बीसेट, यूडब्ल्यू-2, आईटीयू-पीसेट और स्विसक्यूब-1 शामिल हैं। इसरो अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए इसे एक आदर्श और सटीक प्रक्षेपण बताया। नायर ने इस शानदार उपलब्धि के लिए वैज्ञानिकों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस प्रक्षेपण ने एक बार फिर हमारी क्षमता साबित कर दी है। यह टीमवर्क की एक शानदार मिसाल है और पीएसएलवी प्रक्षेपण यान की परिपक्वता साबित हो गई है।
ओशनसेट-2 कक्षा में ओशनसेट-1 की जगह लेगा। ओशनसेट-1 का उपयोग समुद्र विज्ञान के भौतिक और जीव वैज्ञानिक पहलुओं के अध्ययन के लिए किया गया है। ओशनसेट-2 का अभियान पांच साल का होगा। ओशनसेट ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दस साल पूरे कर लिए हैं। ओशनसेट-2 का हमसफर बने नैनों उपग्रहों का वजन दो से आठ किलोग्राम के बीच था। ये यूरोपीय यूनिवर्सिटीज के शैक्षिक उपग्रह हैं ।