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Kshetreeya
Bhopal-Indore Bhopal-Indore स्वाइन
फ्लू के कारण इंदौर और मंदसौर में छह ग्रीन हाउस शुरु नहीं हो पा रहे हैं। इनमें लगने वाले बीज और पौधे पुणो और बंगलुरु से आने हैं जहां स्वाइन फ्लू का प्रकोप सबसे ज्यादा है।
नेशनल हार्टीकल्चर मिशन की हाईटेक हार्टीकल्चर योजना के तहत इंदौर के कृषि महाविद्यालय में तीन ग्रीन हाउस तैयार किए जाने हैं। इन तीन हाउसों में रंगीन लाल मिर्च, जरवेरा और डच गुलाबों की खेती की जानी है। ग्रीन हाउस के लिए पाली हाउस तैयार कर लिए गये है, किन्तु इसमें लगाने के लिए जेरवेरा के पौधे बंगलुरु और पुणो से गुलाब के पौधे और रंगीन लाल मिर्च के बीच मंगाए जाने हैं। इन दोनों शहरों में स्वाइन फ्लू का प्रकोप होने के कारण ये इंदौर नही लाया जा रहा है।
इसी तरह के तीन ग्रीन हाउस मंदसौर में भी बनने है वहां भी इसकी शुरुआत इसी कारण से रुकी हुई है। इस प्रोजेक्ट के निदेशक और जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक ए. के. नायडु ने बिजनेस भास्कर को बताया कि पाली हाउसों को बनाकर तैयार कर लिया गया है। स्वाइन फ्लू का असर जैसे ही कम होता है हम बीजों और पौधों को मंगवा लेंगे। स्वाइन फ्लू का असर धीर-धीर कम हो रहा है जिसे देखते हुए हम उम्मीद कर रहे है कि अगले महीने के अंत तक मंदसौर और इंदौर दोनो स्थानों के ग्रीन हाउसों की शुरुआत हो जायेगी। नीमच की कंपनी एग्रो-फारस्टी सोसाइटी को पौधों और बीजों की आपूर्ति का टेंडर दिया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा अगस्त फ्क्क्त्त में शुरु की गई योजना के अंतर्गत हालीकल्चर के तीन उत्पादों के लिए ग्रीन हाउस बनाने है। जिनसे इनकी उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
मध्य प्रदेश में इसके लिए जबलपुर, मंदसौर और इंदौर का चुनाव किया गया है। इन तीनों स्थानों पर इसकी शुरुआत के लिए ख्.त्तक् करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। यहां के कृषि महाविद्यालयों को इसको तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। जबलपुर के तीन ग्रीन हाउस तो बनकर शुरु हो गये है, जबकि मंदसौर और इंदौर में अभी इसकी शुरुआत नही हो पाई है। इंदौर कृषि महाविद्यालय के डीन अशोक कृष्णा ने बताया कि इसको तैयार करने में छात्रों की मदद ली जारी है। इसके उत्पादों को बेचकर जो लाभ मिलेगा उसका 9क् फीसदी हिस्सा उनमें वितरित कर दिया जायेगा।