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पाकिस्तान
की एक अदालत ने लाहौर पुलिस से पूछा है कि उसने 2007 में आपातकाल के दौरान अवैध तरीके से जजों को बर्खास्त करने के मामले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने से क्यों इंकार कर दिया था। कोर्ट ने इसी आरोप में इस्लामाबाद पुलिस द्वारा पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ मामला दर्ज करने के करीब एक सप्ताह बाद यह टिप्पणी की है।
अतिरिक्त जिला और सेशन जज ने इस्लामपुरा थाने के प्रमुख को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्होंने अधिवक्ता सईद अजहर अली शाह की शिकायत पर मुशर्रफ के खिलाफ मामला दर्ज करने से क्यों इंकार कर दिया था। थानाध्यक्ष को जवाब देने के लिए 2 सितंबर तक का समय दिया गया है। अदालत ने यह नोटिस शाह द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया है जिसमें मुशर्रफ के खिलाफ पुलिस को आपराधिक मामला दर्ज करने की अपील की गई थी।
शाह ने अपनी याचिका में दावा किया कि मुशर्रफ ने आपातकाल के दौरान देशभर के जजों और वकीलों के खिलाफ गैरकानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इसके बाद ही पुलिस अदालतों तथा जजों के घरों में जबरन घुस आई थी और वकीलों पर लाठीचार्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था। शाह का आरोप है कि मुशर्रफ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी सहित कई जजों और वकीलों की नजरबंदी भी अवैध थी।