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विशेष अदालत ने मुंबई आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब के वकील अब्बास काजमी का वह आग्रह ठुकरा दिया है जिसके तहत वारदात स्थलों तथा एमवी कुबेर नौका के निरीक्षण की इजाजत मांगी गई थी। न्यायाधीश एमएल टाहिलियानी ने कहा कि सीआरपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत वकीलों को वारदात स्थलों का दौरा करने की अनुमति दी जाए। फिर भी वकील सार्वजनिक स्थानों पर जाने के लिए मुक्त हैं। इस सिलसिले में कोर्ट की अनुमति जरूरी नहीं है। जज ने कहा कि एमवी कुबेर के मामले में कोर्ट अनुमति नहीं दे सकती, क्योंकि इसे पहले ही इसके मालिक को उसके द्वारा दिए गए बांड के अनुरूप सौंपा जा चुका है। यदि बाद में जरूरत लगी तो वकीलों को दौरे की अनुमति दी जाएगी।
अभियोजन पक्ष ने त्नदेश के खिलाफ युद्ध छेड़नेत्न संबंधी आरोप में यह भी जोड़ने की अपील की कि हमले के षड्यंत्र का एक मकसद जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करना था। जज टाहिलियानी ने 6 मई को कसाब व अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। आरोप संशोधित करने का आवेदन विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने दिया। षड्यंत्र का यह महत्वपूर्ण पहलू देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में प्रतिबिंबित नहीं होता। बचाव पक्ष के वकील तथा काजमी ने अभियोजन के आवेदन का यह कहते हुए विरोध किया कि प्रथम दृष्ट्या ऐसा कोई साक्ष्य नहीं हैं जो बताए कि षड्यंत्र का एक मकसद यह भी था।