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मुंबई
हमले के मुख्य आरोपी अजमल कसाब को अब जेल में उर्दू में लिखी कहानियों की किताबें पढ़नी होंगी। इस मामले की सुनवाई कर रही विशेष कोर्ट ने उर्दू अखबार उपलब्ध कराने के कसाब के आग्रह को मंगलवार को ही ठुकरा दिया था। इस बीच, बुधवार को विशेष कोर्ट के सामने चार और गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए।
कसाब के वकील अब्बास काजमी ने बताया कि उन्हें अपने मुवक्किल को कहानियों की किताब देने के लिए कहा गया है। ऐसी चार किताबें उन्होंने कसाब को देने के लिए आर्थर रोड कारागार के जेलर को सौंपी थी। उन्होंने कहा, मुझे नहीं मालूम कि कसाब ने ये किताबें पढ़ी हैं या नहीं।
मामले के चश्मदीद गवाह व पुलिस के एएसआई मनोहर पांडुरंग गावड़े ने कोर्ट के सामने कसाब को पहचान लिया। गावड़े ने जज एमएल ताहिलयानी को दिए बयान में कहा कि डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ इंस्पेक्टर ने उन्हें गिरगांव चौपाटी पर आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सहायक पुलिस सब इंस्पेक्टर तुकाराम ओंबले के जख्मी होने की सूचना देते हुए जल्द वहां पहुंचने को कहा था। कसाब को एक अलग एंबुलेंस में जबकि उसके जख्मी साथी अबू इस्माइल को वे खुद नायर अस्पताल लेकर गए थे। गावडे ने यह भी बताया कि कसाब ने हमले की रात ही उन्हें अपनी उम्र फ्ख् साल और पाकिस्तानी नागरिक होने की जानकारी दी थी।