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उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को पीलीभीत संसदीय क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार वरुण गांधी के खिलाफ रासुका की कार्रवाई अमान्य ठहराने के यूपी सलाहकार बोर्ड के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मायावती सरकार ने याचिका में कहा है कि सलाहकार बोर्ड आठ मार्च को वरुण गांधी द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण में निहित खतरे को आंकने में विफल रहा है। राज्य सरकार के अनुसार भाषण में वरुण ने मुस्लिमों को एक तरह से धमकी दी थी।
मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षमता वाली खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है। उसी दिन वरुण गांधी की याचिका पर भी सुनवाई होनी है जिसमें उन्होंने रासुका की कार्रवाई को चुनौती दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के सीनियर जज प्रदीपकांत की अध्यक्षता में सलाहकार मंडल ने 8 मई को अपने फैसले में कहा था कि वरुण के खिलाफ रासुका की कार्रवाई के पर्याप्त आधार नहीं हैं। बोर्ड ने पीलीभीत डीएम के स्पष्टीकरण को भी संतोषजनक नहीं माना था। भड़काऊ भाषणों के मामले में गिरफ्तारी और वरुण के समर्थकों के उपद्रव के बाद 29 मार्च को वरुण पर रासुका लगाने की कार्रवाई की गई थी।