|
||||||||||
इलाहाबाद
हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त उत्तर प्रदेश सलाहकार समिति ने भाजपा नेता वरुण गांधी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) को अवैध करार दिया है। इसके साथ ही वरुण पर से तत्काल प्रभाव से रासुका हटा लिया गया और कानून के मुताबिक वह एक आजाद नागरिक हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने 2 मई को वरुण गांधी की अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाकर 14 मई कर दी थी। इस फैसले से वरुण को बड़ी राहत मिली है और वह 13 मई को होने वाले अंतिम चरण के मतदान की तैयारियों में जुट गए हैं।
उल्लेखनीय है कि पीलीभीत में एक जनसभा के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और जब वह गिरफ्तारी देने जा रहे थे तो उस समय भड़की हिंसा के कारण उन पर रासुका लगा दिया गया था। अदालत ने उन्हें पेरोल पर रिहा करने के साथ ही यह शर्त लगाई थी कि वह ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका हो। वरुण गांधी इससे पहले 28 अप्रैल को रासुका लगाए जाने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपनी दलील पेश की थी।
तीन सदस्यीय सलाहकार समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ न्यायाधीश प्रदीप कांत और दो अन्य सदस्य हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज हैं। रासुका मामले पर बनी इस कानूनी समिति को यह अधिकार है कि वह सरकार द्वारा रासुका लगाने के आदेश को मंजूरी दे या रद्द कर दे। समिति का फैसला निर्णायक माना जाता है इसलिए वरुण तत्काल प्रभाव से आजाद हो गए।