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वरुण पर रासुका का फैसला एक हफ्ते टला

भाजपा नेता वरुण गांधी कथित भड़काऊ भाषण देने पर रासुका लगाए जाने के मामले में मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के एडवायजरी बोर्ड के समक्ष पेश हुए। बोर्ड अब एक सप्ताह में अपना निर्णय देगा, जो सरकार के लिए बाध्यकारी होगा। पीलीभीत से भाजपा उम्मीदवार वरुण दोपहर बाद करीब चार बजे कड़ी सुरक्षा के बीच सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय बोर्ड के सामने पेश हुए। बोर्ड में जस्टिस प्रदीप कांत और रिटायर्ड जज टीके सरीन व एसएल सहाय शामिल हैं। वरुण की सुनवाई कैमरे के सामने लगभग 90 मिनट तक चली।

सुनवाई के दौरान वरुण ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) हटाने के संबंध में अपना पक्ष रखा। जबकि पीलीभीत के एसपी प्रकाश डी. ने रासुका लगाए जाने के बारे में राज्य सरकार का पक्ष रखा। सूत्रों के अनुसार, वरुण के मामले में बोर्ड अपनी रिपोर्ट राज्य और केंद्र सरकार को अलग-अलग भेजेगा। इस मामले में बोर्ड का निर्णय अंतिम होगा। यदि बोर्ड ने रासुका हटाने के पक्ष में निर्णय लिया तो वरुण पर से तत्काल रासुका हटा लिया जाएगा।

पीलीभीत प्रशासन ने वरुण पर सांप्रदायिक भाषण देने और 28 मार्च को गिरफ्तारी के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में 29 मार्च को रासुका लगाया था। इसके बाद उन्हें जेल भेजा गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने वरुण द्वारा सांप्रदायिक बयानों से दूर रहने का हलफनामा दिए जाने के बाद 16 अप्रैल को उन्हें पैरोल पर छोड़ने का आदेश दिया। पैरोल की अवधि एक मई को समाप्त हो रही है और उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में वरुण के मामले की सुनवाई भी होनी है।





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