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रक्षा निगरानी क्षमताओं में और इजाफा करने के मकसद से भारत ने सोमवार को इजराइल में बने जासूसी उपग्रह का सफल प्रक्षेपण कर इसे अपनी कक्षा में पहुंचाया। हर मौसम के अनुकूल यह उपग्रह देश की सीमा पर निगरानी में मदद करेगा। यह सेटेलाइट अंधेरी रात और घने कोहरे में भी देश की सीमा पर निगाह रखने में सक्षम है। अब तक सभी भारतीय उपग्रह दृश्यता सीमा में ही संचालित होते थे लेकिन पहली बार रीसैट-2 उपग्रह पृथ्वी की गतिविधियां जानने के लिए माइक्रोवेव फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल करेगा। सूत्रों ने बताया कि इजराइली कंपनी द्वारा बनाया गया यह उपग्रह पृथ्वी पर निगरानी रखने की भारत की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेगा और हर पल की जानकारी रखेगा।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने पीएसएलवी-सी 12 रॉकेट से सुबह 6.45 बजे रडार इमेजिंग सेटेलाइट (रीसैट 2) और माइक्रो एजुकेशनल सेटेलाइट (अनुसैट) को प्रक्षेपित किया जो प्रक्षेपण के 19 मिनट बाद ही कक्षा में स्थापित हो गया। तीन सौ किलोग्राम वजन का रीसैट-2 हर समय देश की सीमा पर निगाह रखते हुए घुसपैठ विरोध और आतंकवाद विरोधी अभियानों में मददगार साबित होगा। इसरो के अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने कहा, त्नवर्ष 2009 की शुरुआत काफी अच्छी रही। प्रक्षेपण का आखिरी समय क्रिकेट मैच से भी ज्यादा रोमांचक रहा। पीएसएलवी-सी 12 लांच व्हीकल का प्रदर्शन काफी शानदार रहा। हमने फिर रिकार्ड बनाया है। हमने पहले ही प्रक्षेपण की तारीख और समय घोषित किया था और इसे समय पर पूरा किया।त्नउन्होंने कहा कि रीसैट-2 देश के संसाधनों के लिए अच्छी संपत्ति है और मुझे विश्वास है कि यह ठीक तरीके से देश की सेवा करेगा। रीसैट दो किसी भी मौसम में पृथ्वी की तस्वीर खींचने में सक्षम है और बाढ़ तथा भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बारे में भी पता लगाने में उपयोगी है। रीसैट-2 के साथ ही 40 किलोग्राम वजन का सूक्ष्म उपग्रह अनुसैट भी प्रक्षेपित किया गया जिसे अन्ना विश्वविद्यालय ने तैयार किया है।
पहली बार किसी भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए उपग्रह अनुसैट के जरिये संदेश को संग्रहित कर इसे आगे भेजा जा सकता है। इससे गोपनीय शैक्षिक सामग्रियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा सूखा और बंजर भूमि शहरी योजना एवं अन्य अध्ययनों में भी इससे सहायता मिलेगी। रीसैट-2 का जीवनकाल तीन वषरें का और अनुसैट का एक वर्ष का है। पूर्व के सुदूर संवेदन उपग्रहों से अलग रीसैट-2 में सिंथेटिक एपरेचर रडार (एसएआर) लगा है। यह सिग्नल के लिए कई एंटिना से लैस है जिससे स्पष्ट तस्वीरें खींची जा सकती है। एसएआर का निर्माण इजराइल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने किया है जो रक्षा क्षमताओं से युक्त है।
एसएआर दिन-रात किसी भी मौसम और बादल वाले मौसम में भी तस्वीर खींच सकता है। इससे पहले भारतीय उपग्रहों में ऐसी क्षमता नहीं थी। नायर ने कहा कि इसरो को इस वर्ष बड़े लक्ष्य प्राप्त करने हैं। भारत पहले खुद अपना रीसैट विकसित करने में जुटा था लेकिन परियोजना में हो रही देरी के कारण इसने इजराइल की मदद ली और एसएआर बनाया। पीएसएलवी ने आज 15वीं उड़ान भरी। 1993 से अब तक इसने 30 उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं जिसमें 14 भारतीय और 16 अन्य देशों के हैं। पीएसएलवी ने पिछले वर्ष 22 अक्तूबर को चंद्रयान-एक का भी प्रक्षेपण किया था।