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चिदंबरम के रवैये के विरोध में पत्रकार ने फेंका जूता

गृहमंत्री पी. चिदंबरम के साथ मंगलवार को हुए एक वाकये ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के इराक दौरे की याद दिला दी। चिदंबरम एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, कि अचानक एक पत्रकार ने उनकी ओर जूता फेंक दिया। इराक में भी बुश पर एक पत्रकार ने जूता फेंका था। हालांकि चिदंबरम बच गए और जरनैल सिंह नाम के पत्रकार द्वारा फेंका गया जूता उन्हें लगा नहीं,लेकिन यह घटना पत्रकारों के प्रति चिदंबरम के रवैये पर भी सवाल खड़े करती है।

जूता फेंकने वाला पत्रकार 1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को सीबीआई की तरफ से क्लीन चिट दिए जाने पर सवाल पूछ रहा था। जरनैल ने चिदंबरम से पूछा था कि क्या सीबीआई ने गृह मंत्रालय के दबाव में सिख दंगों के आरोपियों को क्लीन चिट दी है। इस पर चिदंबरम ने कहा कि सीबीआई गृह मंत्रालय के तहत नहीं आती और उसने कोर्ट को रिपोर्ट दी है, हमें कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। चिदंबरम ने यह भी कहा कि जहां तक मुझे पता है, न तो गृह मंत्रालय ने और न ही किसी अन्य मंत्रालय ने सीबीआई पर दबाव डाला है। इस पर जरनैल ने कहा, इसका मतलब है आप सिखों को न्याय नहीं दिलाना चाहते। जवाब में चिदंबरम ने कहा कि आप बहस कर रहे हैं। गृहमंत्री के इतना कहते ही जरनैल ने अपना जूता उनकी ओर फेंक दिया।

सवालों पर कभी सहज नहीं होते गृहमंत्री नई दिल्ली। इस पूरे प्रकरण में जो बात दब गई, वह है पत्रकारों के प्रति चिदंबरम का आम तौर पर रहने वाला रवैया। चिदंबरम पत्रकारों के सवालों को कभी सहजता से नहीं लेते। वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते वक्त अपनी तरफ से बुलाए गए कई संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि यह कान्फ्रेंस सवाल-जवाब के लिए नहीं है। अगर कोई व्यक्ति प्रेस कान्फ्रेंस बुलाता है, तो पत्रकारों के सवालों का संतोषजनक जवाब देना भी उसी की जिम्मेदारी है। सवाल उठाना या तर्क करना चिदंबरम को जरा भी पसंद नहीं, जबकि सवाल पूछना या बहस करना किसी भी पत्रकार का धर्म होता है। यहां हम दो घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं जो पत्रकारों के प्रति चिदंबरम के रुख को जाहिर करती हैं।

जब चिदंबरम वित्त मंत्री थे, तो एक न्यूज चैनल में बजट बाद साक्षात्कार के लिए बैठे थे। कृषि ऋण माफी से जुड़ा एक सवाल उन्हें इतना नागवार गुजरा कि वह अचानक उठकर चल दिए। काफी मान-मनौव्वल के बाद ही वह माने और साक्षात्कार पूरा हुआ। वित्त मंत्रालय छोड़ने से कुछ दिनों पहले भी एक पत्रकार सम्मलेन में जब उनसे कुछ पूछा गया तो उनका टका सा जवाब था कि यहां कोई सवाल न पूछा जाए। इस पर एक पत्रकार ने कहा कि जब सवाल-जवाब नहीं होना है, तो यह सम्मेलन क्यों बुलाया गया है। इस पर चिदंबरम बोले कि ठीक है, मैं चला जाता हूं।





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