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संसदीय
चुनाव के बीच में ही 1984 के सिख विरोधी दंगे के मामले में सीबीआई द्वारा कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर कर क्लीन चिट दिए जाने से सिखों में आक्रोश फैल गया है। शुक्रवार को राजधानी में पांच सिखों ने जहां आत्मदाह की कोशिश की वहीं राजनीतिक दलों ने भी इस मामले को उछालना शुरु कर दिया है। पंजाब में अकाली दल बादल ने इस मुद्दे को चुनावी रंग देना भी शुरु कर दिया है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य कुलदीप सिंह भोगल की अगुवाई में पांच सिखों ने बंगला साहिब गुरुद्वारे के बाहर अपने ऊपर पेट्रोल छिड़कर आग लगाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। भोगल ने कहा कि 84 के दंगे के 25 साल बीत जाने के बाद भी दंगा पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया है। जबकि इंदिरा गांधी के हत्यारों को चार साल के अंदर फांसी दे दी गई। उन्होने बताया कि सरकारी आंकड़े केवल तीन हजार लोगों के मारे जाने की पुष्टि करते हैं जबकि सच्चाई यह है कि इस दंगे में करीब 10 हजार लोग मारे गए।
भोगल ने कहा कि जब तक टाइटलर और सज्जन कुमार को सजा नहीं मिल जाती तब तक इनका आंदोलन जारी रहेगा। उधर पंजाब में भी इस मामले को लेकर राजनीति गरम हो गई है। विभिन्न सिख संगठनों ने इस मामले में न्याय की मांग है।