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केंद्रीय जांच ब्यूरो ने माकपा की राज्य इकाई के सचिव पी. विजयन को एसएनसी लवलीन मामले में नौवें आरोपी के रूप में शामिल करने के लिए हाईकोर्ट से इजाजत मांगी है। यह मामला 1990 के दशक में राज्य में तीन पनबिजली परियोजनाओं के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। उधर, केरल के मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंद ने लवलीन मामले पर अपनी चुप्पी बरकरार रखी है जिसमें माकपा के राज्य सचिव को दोषी ठहराया गया है। सीबीआई की चेन्नई इकाई द्वारा जांच एजेंसी की विशेष अदालत में पेश की गई मामले की प्रगति रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व बिजली मंत्री विजयन को नौवें आरोपी के रूप में शामिल किया जाना है। कनाडाई कंपनी एसएनसी लवलीन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कलउस ट्रेंडिल को मामले में 11वां आरोपी तथा पूर्व संयुक्त सचिव को दसवां आरोपी बनाया गया है।
मामले में कुल 11 आरोपी हैं। अन्य आरोपियों में पूर्व प्रधान सचिव (बिजली) और केरल राज्य विद्युत बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के मोहनचंदन शामिल हैं जो पहले आरोपी हैं। पूर्व सदस्य (अकाउंट्स) जी. राजशेखरन नायर को दूसरा आरोपी बनाया गया है। आठ अन्य को सीबीआई पहले ही आरोपी के रूप में सूचीबद्ध कर चुकी है। उधर दिल्ली में पार्टी नेताओं से चर्चा के बाद लौटे केरल के मुख्यमंत्री अच्युतानंद ने पत्रकारों के बार-बार पूछने के बावजूद इस मामले में कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
माकपा पोलित ब्यूरो ने गुरुवार को विजयन का बचाव करते हुए तर्क दिया था कि उन्हें केंद्र की कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दबाव में जांच एजेंसी द्वारा फंसाया गया है क्योंकि सरकार वामदलों द्वारा समर्थन वापस लिए जाने की खुन्नस निकालना चाहती है। लेकिन राज्य में पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शुरू से ही विजयन का खुला समर्थन कर रहे हैं जिनमें गृह मंत्री के. बालकृष्णन भी शामिल हैं। इस बीच युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विजयन के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया और बालाकृष्णन का पुतला फूंका। बालाकृष्णन ने बयान दिया था कि कांग्रेस अपने राजनीतिक मकसद के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है।